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रहस्य‑रोमांस की कहानी

 
*रहस्य‑रोमांस की कहानी – राम‑लखन की जुबानी*

मैं राम, गाँव के किनारे पुरानी हवेली का रखवालों में से एक। आज मैं तुम्हें उस रात की कहानी सुनाता हूँ, जब लखन और मैं चाँदनी में खोए हुए प्रेम और छिपे हुए रहस्य के जाल में फँस गए।

हवेली के पीछे एक बावली थी, जिसकी पानी में कभी‑कभी तैरते हुए फूलों की महक आती थी। लखन, कहते थे कि उस बावली में एक रहस्यमयी रली है, जो केवल शुद्ध दिल वाले को ही दिखती है। मैं हँस कर कहता— “भाई, ये तो बस पुरानी बातें हैं।” पर दिल में एक अज्ञात खिंचाव था।

एक रात, जब गाँव में बरसात की बूंदें टपक रही थीं, लखन ने मुझे बुलाया। “राम, आज मैं तुझे वह रली दिखाऊँगा,” वह धीरे‑धीरे फुसफुसाया। हम बावली के पास पहुँचे, जहाँ पानी में चाँद की रोशनी पिघली हुई चाँदी जैसी चमक रही थी। लखन ने हाथ बढ़ाया, और अचानक पानी में एक चमकती हुई परछाई उभरी— एक सुंदर लड़की, जिसका नाम मीरा था, जो हवेली की पुरानी कहानी में खोई हुई थी।

मीरा ने कहा, “मैं इस बावली की रली हूँ, पर मैं केवल वही देख सकती हूँ जो दिल से सच्चा हो।” उसकी आँखों में एक अँधेरा रहस्य था, पर साथ ही एक गहरा प्रेम भी। लखन ने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और कहा, “मैं तुम्हें इस बंधन से आज़ाद करूँगा।”

पर बावली के नीचे एक गुप्त दरवाज़ा खुला, जहाँ एक पुराना ख़ज़ाना छिपा था— वह ख़ज़ाना नहीं, बल्कि एक जादुई किताब थी, जिसमें लिखा था कि जो भी इस बावली की रली को दिल से चाहेगा, वह उसकी सच्ची प्रेम कहानी को जीवित कर देगा।

मैं, राम, समझ गया कि लखन का दिल मीरा के लिए धड़क रहा है, पर साथ ही वह बावली के रहस्य को भी सुलझाना चाहता है। हमने मिलकर किताब पढ़ी, और बावली के पानी ने हमें एक चमकदार पुल दिखाया, जो सीधे मीरा के दिल तक ले जाता था।

जब हम पुल पार कर रहे थे, तो अचानक बावली की आवाज़ गूँजी— “सच्चाई का प्रकाश ही बंधन तोड़ता है।” मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारा प्रेम मेरे बंधन को तोड़ देगा।”

लखन ने अपना दिल खोल दिया, और मीरा धीरे‑धीरे बावली में विलीन हो गई, लेकिन उसकी यादें हमारे दिलों में हमेशा के लिये रह गईं।

अब गाँव वाले कहते हैं, जब भी बावली में चाँद की रोशनी पड़ती है, तो लखन की आवाज़ सुनाई देती है— “मैं तुम्हें हमेशा याद रखूँगा, मीरा।” और मैं, राम, इस रहस्य को सुनाते‑सुनाते, अपने दिल में उस रोमांस को हमेशा के लिये रखूँगा।- 

*रली* शब्द का अर्थ है “रहस्यमयी वस्तु” या “जादुई रत्न/आँखी”। अक्सर लोक‑कथाओं में इसे ऐसी चीज़ के रूप में चित्रित किया जाता है जो केवल शुद्ध‑दिल वाले को ही दिखाई देती है या जो किसी विशेष शक्ति को धारण करती है। आपके द्वारा सुनी गई कहानी में, रली वह रहस्यमयी तत्व थी जो बावली में छिपी थी और प्रेम तथा रहस्य को जोड़ती थी।

- सुख मंगल सिंह
 वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी 
अवध निवासी 



Sukhmangal Singh

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