"पंजाब का इतिहास "
सप्तसिंधु की धरती, पाँच नदियों का देश है पंजाब,
इतिहास के पन्नों पर लिखा, इसका गौरवशाली हिसाब।
सिंधु घाटी से शुरू हुई, इसकी पहली पहचान,
हड़प्पा मोहनजोदड़ो तक, फैला था इसका मान।
वेदों की ऋचाएं गूँजी, यहाँ सरस्वती के तीर पर,
आर्यों ने बसाया डेरा, झेलम चिनाब के नीर पर।
सिकंदर आया झेलम तक, पोरस ने किया संग्राम,
झेलम तट पर गूँजा था, वीरता का पहला नाम।
मौर्य, गुप्त, कुषाणों ने, यहाँ राज किया अपार,
फिर गज़नी के हमलों ने, किया इसको तार-तार।
गुरु नानक ने जन्म लिया, तलवंडी ननकाना धाम,
मानवता का पाठ पढ़ाया, दिया एक ओंकार का नाम।
दस गुरुओं की वाणी से, जागा नया विहान,
गुरु गोबिंद ने खालसा रच, दिया कौम को प्राण।
अमृत छका, सिंह बनाया, दे दी कृपाण की शान,
चिड़ियों से बाज लड़ाये, रख लिया धर्म का मान।
अहमद शाह अब्दाली ने, कई बार किये वार,
पर सिख मिसलों ने मिलकर, किया उसका संहार।
बारह मिसलों से उठा, एक शेर ए पंजाब,
महाराजा रणजीत सिंह बना, जिसका बड़ा खिताब।
लाहौर को राजधानी बना, किया शासन विशाल,
पेशावर से कश्मीर तक, गूँजा उसका प्रताप।
अंग्रेजों से दो जंग हुई, फिर भी झुका न शीश,
पंजाब ने दी कुर्बानी, देशभक्ति के लिए बीस।
जलियाँवाला बाग में, गोलियों ने लिया प्राण,
उधम सिंह ने बदला लिया, रख लिया देश का मान।
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की धरती यही,
कर्तार सिंह सराभा जैसे, वीरों की कमी नहीं।
हरित क्रांति का नायक, बना यही पंजाब,
देश का पेट भरने वाला, अन्नदाता बेमिसाब।
भांगड़ा, गिद्दा, हीर-रांझा, इसकी मिट्टी की शान,
गुरुओं की, पीरों की धरती, रखती सबका ध्यान।
आज भी लहलहाते खेत, गाते हैं ये गान,
पंजाब जिएगा जब तक, जिएगा हिंदुस्तान।।
सुख मंगल सिंह
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