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"प्रेम का प्याला"

 
"प्रेम का प्याला" 

प्रेम का प्याला मीठा है पर विष भी इसमें घुलता है,  
एक घूँट में जीवन मिले एक घूँट में सब छूटता है । 

माँ की लोरी में घुला हो तो संस्कार बन जाता है, 
पिता के पसीने में मिला हो तो आशीष बन जाता है।

भाई के कंधे पर रखा हो तो हौसला बन जाता है,  
बहन की चिट्ठी में लिखा हो तो धीरज बन जाता है।  

प्रेम का प्याला बाँटो तो दुश्मन भी अपना हो जाए,  
प्रेम का प्याला सूखे तो रिश्ता भी तन्हा हो जाए।  

देश की माटी में घोलो तो क्रांति की ज्वाला भड़के, 
परिवार की रसोई में घोलो तो भूख भी मीठी लगे।  

हे भारत माँ तेरा प्रेम अमृत से भी पावन है,  
तेरे प्रेम के प्याले में तन मन धन सब अर्पण है।  

जब तक साँस चले इस प्याले को भरते रहेंगे,  
तेरी गोद में पिएँगे तेरी गोद में मरते रहेंगे।

- सुख मंगल सिंह, 
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक, 
वाराणसी वासी, अवध निवासी, अंबेडकर नगर जनपद, उत्तर प्रदेश,भारत।







Sukhmangal Singh

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