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पिकिया नदी की यादें

 


*संस्मरण: पिकिया नदी की यादें*

मैं जब भी अपने स्कूल के दिनों को याद करता हूं, तो मेरे मन में एक छवि उभरती है - पिकिया नदी की। वह नदी जो हमारे स्कूल, राष्ट्रीय इंटर कॉलेज तेंदुआ कला जनपद फैजाबाद (वर्तमान अंबेडकर नगर) के पास से गुजरती थी। सन 1973 की बात है, जब मैं उस स्कूल में पढ़ता था।

पिकिया नदी हमारे लिए एक चुनौती थी, एक ऐसी चुनौती जिसे हम हर रोज पार करते थे। नदी के उस पार जाने के लिए हमें एक हाथ में झोला(बैग ) लेकर नदी के उस पार रखना पड़ता था, और फिर जाकर कपड़े लेकर उस पार जाना पड़ता था। यह एक ऐसा काम था जो हम दोनों समय करते थे - सुबह स्कूल जाने से पहले और शाम को घर लौटते समय।

मेरे कई साथी इस काम में मेरे साथ थे। हम सभी एक साथ नदी के किनारे इकठ्ठे होते, अपने झोले लेकर नदी के उस  पार रखते, और फिर एक-एक करके नदी को पार करते। यह एक मजेदार अनुभव था, जिसमें हमारा बचपन छलकता था।

लेकिन इस संस्मरण में एक घटना है जो मुझे आज भी याद है। एक दिन, जब हम नदी के किनारे पहुंचे, तो देखा कि नदी का पानी सामान्य से ज्यादा था। हमारे कई साथी डर गए, लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि हम सब साथ हैं, और हम इसे पार कर सकते हैं।

हमने अपने झोले लिए, और एक-एक करके नदी को पार करना शुरू किया। मैं सबसे पहले गया, और जब मैं उस पार पहुंचा, तो मैंने अपने साथियों को इंचार्ज किया। एक-एक करके सभी ने नदी को पार किया, और जब हम सब उस पार पहुंच गए, तो हमने एक दूसरे को देखा, और खुशी से चिल्ला उठे।

यह एक छोटी सी घटना थी, लेकिन मेरे लिए यह एक बड़ा संस्मरण है। यह मुझे सिखाती है कि जब हम साथ होते हैं, तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। और यह भी सिखाती है कि बचपन में की गई छोटी-छोटी चीजें ही हमारे जीवन के सबसे बड़े संस्मरण बन जाती हैं।

- सुख मंगल सिंह 
 वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी, अवध निवासी अंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश 
Sukhmangal Singh

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