Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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पतंग उड़ती है आसमान में

 
पतंग उड़ती है आसमान में,
रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
हवाओं के साथ खेलती है,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।
पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
सपनों को बनाती है साकार।

पतंग की रील में फंसकर,
जीवन को मिलती है दिशा।
पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।
पतंग उड़ती है हवाओं में,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग उड़ती है आसमान में,
रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।

उल्लाल छन्द में रचना:
पतंग उड़ती है आसमान में,
रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
हवाओं के साथ खेलती है,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।
पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
सपनों को बनाती है साकार।


पतंग उड़ती है आसमान में,
रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
हवाओं के साथ खेलती है,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।
पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
सपनों को बनाती है साकार।

पतंग की रील में फंसकर,
जीवन को मिलती है दिशा।
पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग उड़ती है हवाओं में,
जीवन को बनाती है सुंदर।
पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।

उल्लाल छन्द में रचना:
पतंग उड़ती है आसमान में,
रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
हवाओं के साथ खेलती है,
जीवन को बनाती है सुंदर।

पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।
पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
सपनों को बनाती है साकार।

पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
जीवन को बनाती है सुंदर।
पतंग की धुन सुनकर,
दिल को मिलती है खुशी।

पतंग उड़ती है हवाओं में,
जीवन को बनाती है सुंदर।
पतंग की रील में फंसकर,
जीवन को मिलती है दिशा।।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
 वाराणसी वासी,अवध निवासी 
Sukhmangal Singh

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