परीक्षा संस्मरण:
परीक्षा का वह दिन मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण संस्मरण है। मैं हाई स्कूल की परीक्षा देने के लिए गांव से शहर आया था। पिताजी ने गांव की एक मौर्य की लड़की के यहां रहने की व्यवस्था कर दी थी, जिसके घर पर सुरती का कारोबार होता था। उनके खेतों में सुरती लगाई जाती थी।
उस घर में रहने का अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था। सुरती की गंध ने मेरे नाक को सहन नहीं हो रहा था, लेकिन परीक्षा के लिए मुझे वहां रुकना था। मैं अपने आप को उस वातावरण में ढालने की कोशिश कर रहा था।
एक दिन, परीक्षा के दौरान, मुझे मैथ के एक प्रश्न का उत्तर नहीं आ रहा था। जो आधा नंबर का था । मैंने अपने एक रिश्तेदार से जो समय ड्यूटी पर थे उनसे पूछा। उन्होंने मुझे जवाब दिया, " आधा नंबर से ना तो आप पास हो जाएंगे और ना ही फेल होंगे। इसलिए हमसे ऐसा काम मत कहिए। अपने ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रयोग करके परीक्षा दीजिए।"
उनके शब्दों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। मैंने अपने आप को संभाला और अपने ज्ञान और बुद्धि का प्रयोग करके परीक्षा दी। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि परीक्षा में पास होना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि अपने आप पर विश्वास करना और अपने प्रयासों पर भरोसा करना।
उस दिन के बाद, मैंने अपने आप से वादा किया कि मैं कभी भी अपने आप को कम नहीं आंकूंगा और हमेशा अपने ज्ञान और बुद्धि पर भरोसा करूंगा।
- सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी
Sukhmangal Singh
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