पहले अपनी ओर निहारो,
अपने दिल की बात सुनो।
अपने आप को समझो,
अपने जीवन का मर्म जानो।
अपने गुणों को पहचानो,
अपने दोषों को दूर करो।
अपने आप को सुधारो,
अपने जीवन को सवारो।
अपने आप को प्यार करो,
अपने आप को सम्मान दो।
अपने जीवन को जीने दो,
अपने आप को मुक्त करो।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक, वाराणसी
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