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"पटाखे वाली दीवाली"

 

दीपावली पर हास्य व्यंग्य रचना

          "पटाखे वाली दीवाली"

सुनो भैया, इस बार दीवाली में, गजब का हाल हुआ,
पड़ोसी ने बम चलाया, मेरा कुत्ता बेहाल हुआ।

कुत्ता भागा छत पर, बिल्ली घुसी कुकर में,
दादी बोली - "बेटा, ये बम है कि भूकंप है घर में?"

पत्नी बोली - "सुनो जी, सोना लाना इस बार,
पति बोला - "भाग्यवान, सोना छोड़ो, पहले झाड़ू लाओ यार।

धनतेरस पर झाड़ू लाये, लक्ष्मी जी खुश हो जायें,
सासू माँ बोली - "बेटा, झाड़ू से ही घर के भूत भाग जायें।"

बच्चे बोले - "पापा, इस बार अनार लाना,
पापा बोले - "बेटा, पहले पुराना उधार चुकाना।"

मोहल्ले में चंदा माँगने, नेता जी आ गये,
बोले - "दीवाली पर लाइट लगेगी, वोट फिर से पा गये।"

हमने कहा - "नेता जी, लाइट तो पहले से है,
बोले - "तुम्हारे घर की नहीं, मेरे घर की बात है।"

पटाखे की दुकान पर, भीड़ ऐसी लगी,
जैसे राशन की दुकान पर, मुफ्त चीनी बंट रही।

एक बच्चा बोला - "अंकल, रॉकेट देना,
दुकानदार बोला - "बेटा, पहले अपनी नाक तो पोंछ लेना।"

रात को जब लक्ष्मी पूजा, सबने किया प्रणाम,
पति ने माँगा - "हे लक्ष्मी, पत्नी को दे दो आराम।"

पत्नी बोली - "हे लक्ष्मी, पति को दे दो अकल,
जो दीवाली पर भी, माँगे मुझसे नकल।"

अंत में सुख मंगल बोला, सुनो मेरे यार,
दीवाली हँसकर मनाओ, यही है सच्चा त्योहार।

पटाखा फोड़ो कम, दिल के दीये जलाओ ज्यादा,
तभी तो होगी दीवाली, वरना है सब बेकार।।

रचनाकार - सुख मंगल सिंह

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