Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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*नई शुरुआत*

 


समंदर में हमने एक लकीर खींच दी है,
घनघोर बादलों ने सोचा मेरी कुंडली खोटी।

इस पंक्ति में कवि कह रहे हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कुछ नया और अनोखा करने की कोशिश की है, जैसे कि समंदर में एक लकीर खींचना। लेकिन कुछ लोग, जो शायद इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, वे सोचते हैं कि कवि की कुंडली में कुछ खोट है, जो उनके जीवन में समस्याएं पैदा कर रहा है।

*नई शुरुआत*

कवि ने समंदर में एक लकीर खींचकर एक नई शुरुआत की है। यह लकीर एक नए अवसर, एक नए सपने, या एक नए लक्ष्य की प्रतीक हो सकती है। कवि ने अपने डर को पार कर लिया है और कुछ नया करने की हिम्मत की है।

*दूसरों की सोच*

लेकिन कुछ लोग, जो शायद इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, वे कवि की कुंडली में खोट निकाल रहे हैं। वे सोचते हैं कि कवि की समस्याएं उनकी कुंडली के कारण हैं, न कि उनके अपने प्रयासों की कमी के कारण।

*आत्मविश्वास*

इस पंक्ति में कवि ने अपने आत्मविश्वास को प्रकट किया है। वह जानता है कि उसने कुछ गलत नहीं किया है और वह अपने निर्णयों पर अडिग है। वह दूसरों की सोच को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे रहा है और अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी, अवध निवासी 
, Sukhmangal Singh

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