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Dr. Srimati Tara Singh
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मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी जैसा "व्यंग्य गीत"

 
मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी जैसा "व्यंग्य गीत"  


मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरह धरा पर,  
क्या अब भारत में कोई आने वाला है।  
राम लला के खातिर कुर्सी की मोह नहीं करने वाला,  
नहीं दबा किसी शक्ति से हुंकार किया अवध - लाल।  

भारत उसका आभारी है आभारी है राम भक्त,  
बड़ी संगठन तब भी थे अपनी लोटिया लेकर लट्ठ।  
ना कहेंगे ना खाने देंगे ऐसे नेता भारत में आए,  
राम का खजाना लूट गया बोल कुछ ना सुनाएं।  

आज कुर्सी मिलते ही वादे बदल जाते हैं,  
मंच पर राम और मंच के पीछे सौदे पल जाते हैं।  
बाबरी से पहले बड़े-बड़े भाषण थे चलते,  
अब फीता काटो और फोटो खिंचवाकर चलते।  

कहते थे हम राम के हैं, राम हमारे हैं,  
अब राम का नाम बेचकर, ठेकेदारी करते सारे हैं।  
चंदा माँगा मंदिर के नाम, हिसाब कोई माँगे तो,  
कहते हैं आस्था पर सवाल, ये कैसा घाव दे गए।  

कल्याण सिंह जैसा जिगर कहाँ अब मिलता है,  
बिना दबाव के फैसला ले, सीना तान के चलता है।  
आज तो फाइल अटकी है, बाबू के दस्तखत पर,  
मंत्री जी विदेश गए हैं, मीटिंग है निवेशक पर।  

उस जमाने में लट्ठ लेकर कार्यकर्ता खड़ा था,  
आज कार्यकर्ता फोन लेकर, व्हाट्सएप ग्रुप में पड़ा था।  
उस वक्त नारा गूंजता था, एक ही नारा राम का,  
अब नारा बदल गया है, विकास और काम का।  

राम का खजाना लूट गया, सबने आँखें मूंद लीं,  
मीडिया ने बहस छेड़ी, पर मुद्दा ही बदल दिया।  
कोई बोला पाकिस्तान, कोई बोला चीन का डर,  
आम आदमी बोला महंगाई, उसे कह दिया वो है टेरर।  

नेता कहते हम सेवक हैं, जनता मालिक कहलाती,  
सेवक बंगले में रहते, मालिक लाइन में घिस जाती।  
बिजली बिल बढ़ा तो बोले, सब्सिडी अगले साल,  
टोल टैक्स लगा तो बोले, सड़क बनेगी बेहाल।  

मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरह धरा पर,  
क्या अब भारत में कोई आने वाला है।  
जो कहे सो कर दिखाए, वादे पर कायम रहे,  
राम के नाम पर राजनीति नहीं, राम राज्य की राह चले।  

अगर ऐसा कोई आएगा, तो जनता फिर जागेगी,  
नहीं तो हर पाँच साल, यही तमाशा आगे भागेगी।।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी वासी, 
अवध निवासी, अंबेडकर नगर जनपद, उत्तर प्रदेश, 
भारत 


Sukhmangal Singh

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