Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

मेरा घर

 
मेरा घर 


मेरा घर एक छोटा सा आशियाना है, जहां हंसी-खुशी का माहौल हमेशा बना रहता है। घर के आंगन में सुबह की पहली किरण के साथ ही उजाला फैल जाता है, जो पूरे घर को रोशन कर देता है। खिड़की से आने वाली प्रकाश की किरणें घर के अंदरूनी हिस्सों को भी जगमगा देती हैं।
एक रचना प्रस्तुत:
वक्त की धूप में भी यह रिश्ता महकता रहा,
प्यार की खुशबू से हर पल महकता रहा।
दिल की धड़कनों में यह रिश्ता चहकता रहा,
खुशियों की बरसात में यह रिश्ता चमकता रहा।

आंखों की चमक में यह रिश्ता दमकता रहा,
दिल की गहराइयों में यह रिश्ता लहकता रहा।
प्यार की धुन में यह रिश्ता खनकता रहा,
वक्त की धूप में भी यह रिश्ता सिसकता रहा।

यादों की बारिश में यह रिश्ता भीगता रहा,
दिल की दीवारों पर यह नाम लिखता रहा।
प्यार की राहों में यह रिश्ता चलता रहा,
वक्त की तेज़ हवाओं में भी यह टिकता रहा।

दिल की धड़कनों में यह रिश्ता बसता रहा,
प्यार की दुनिया में यह रिश्ता हंसता रहा।
आंखों की नमी में यह रिश्ता झलकता रहा,
वक्त की धूप में भी यह रिश्ता महकता रहा।।

घर के अंदर बच्चों की किलकारियां गूंजती रहती हैं, जो घर के माहौल को और भी खुशनुमा बना देती हैं। बच्चे घर के आंगन में खेलते हैं, उनकी हंसी और शोरगुल घर के माहौल को जीवंत बना देता है। घर के बड़े-बुजुर्ग भी बच्चों के साथ खेलते हैं और उन्हें कहानियां सुनाते हैं।

प्रेम पर रचना:

प्रेम ही परम धर्म है, यह जगत की सच्चाई,
इसमें बसी है मानवता, इसमें बसी है खुदाई।
प्रेम की राह पर चलना, जीवन की सच्ची जीत,
इसमें मिलती है शांति, इसमें मिलती है प्रीत।

प्रेम का रंग निराला, सब रंगों से प्यारा,
इसमें डूब जाने को, दिल करता है इशारा।
प्रेम की भाषा अनोखी, सब भाषाओं से न्यारी,
इसमें बसी है ममता, इसमें बसी है प्यारी।

प्रेम का सागर गहरा, इसमें डूब जाने की चाह,
इसमें मिलती है मुक्ति, इसमें मिलती है राह।
प्रेम का सूरज चमकता, अंधेरे को मिटाता,
इसमें बसी है रोशनी, इसमें बसी है जिंदगी।

प्रेम का संगीत मधुर, सब सुरों से प्यारा,
इसमें बसी है तान, इसमें बसी है ताल।
प्रेम का संसार अनोखा, सब संसार से न्यारा,
इसमें बसी है खुशी, इसमें बसी है बहार।।

घर के आंगन में एक छोटा सा बगीचा है, जहां फूलों की खुशबू हमेशा बनी रहती है। यहां बैठकर चाय पीने का मजा ही कुछ और है। घर के अंदरूनी हिस्सों में भी फूलों की सजावट की जाती है, जो घर के माहौल को और भी सुंदर बना देती है।
बैठे-बैठे मन का गुनगुना :
आओ ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है,
वसंत ऋतु की बहार, तुम्हारा आगमन है।
तुम्हारे आने से, प्रकृति में खुशी छाई,
फूलों की महक, हवा में आई।

तुम्हारे आने से, पेड़ों में नई जान आई,
पत्तियों की हरियाली, मन को भाती है।
तुम्हारे आने से, प्रेम की भावना जागी,
हृदय में प्रेम की, ज्योति छाई।

तुम्हारे आने से, जीवन में रंग भर गया,
प्रेम और खुशी का, संचार हुआ है।
तुम्हारे आने से, संसार सुहाना है,
आओ ऋतुराज, तुम्हारा स्वागत है।

तुम्हारे आने से, जीवन है सुहाना,
प्रेम और खुशी का, है यह कारवां।
तुम्हारे आने से, जीवन है प्यारा,
आओ ऋतुराज, तुम्हारा स्वागत है।।

मेरा घर एक ऐसा स्थान है, जहां हर पल खुशियों से भरा होता है। यहां हर कोई एक दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आता है। घर के माहौल को बनाए रखने के लिए हर कोई अपना योगदान देता है। मेरा घर एक ऐसा स्थान है, जहां मैं हमेशा खुश और सुरक्षित महसूस करता हूं।
क्षणिकाएं:

1. जीवन एक क्षण है, जी लो इसे
हर पल को बनाओ, एक सुंदर क्षण

2. समय की गति है तेज, नहीं रुकेगा
क्षण भर में बदल जाएगा, सब कुछ

3. क्षण भर का साथ है, जीवन का
जी लो इसे, प्यार से और खुशी से

4. हर क्षण एक अवसर है, आगे बढ़ने का
नहीं खोना चाहिए, इसे कभी

5. क्षणिकाएं गुजर जाती हैं, नहीं आती वापस
जी लो इसे, पूरी तरह से और खुशी से ।

घर के माहौल को और भी सुंदर बनाने के लिए हम सभी मिलकर प्रयास करते हैं। हम घर के आंगन में पेड़-पौधे लगाते हैं, जो घर के माहौल को और भी हरा-भरा बना देते हैं। हम घर के अंदरूनी हिस्सों में भी सजावट करते हैं, जो घर के माहौल को और भी सुंदर बना देती है। मेरा घर एक ऐसा स्थान है, जहां मैं हमेशा खुश और संतुष्ट महसूस करता हूं। 
मानव जीवन पाया है तो, कुछ कर दिखाना होगा,
जीवन को सार्थक बनाने के लिए, कुछ बड़ा करना होगा।
कुछ ऐसा काम करना होगा, जो लोगों को याद रहे,
मानव जीवन पाया है तो, कुछ कर दिखाना होगा।

- सुख मंगल सिंह 
 वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक, वाराणसी 
Sukhmangal Singh


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