Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मौन ?

 


मौन की व्यथा, दिल की कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दर्द की भाषा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, आंसुओं की धारा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दिल की पुकार,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।
          #---#
मौन की व्यथा, दिल की कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दर्द की भाषा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, आंसुओं की धारा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दिल की पुकार,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, दर्द की कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, जीवन की व्यथा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, दिल की दर्द,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दर्द की कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।
          #----#
मौन की व्यथा, दिल की कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दर्द की भाषा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, आंसुओं की धारा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, दिल की पुकार,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, दर्द की कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, जीवन की व्यथा,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।

मौन की व्यथा, दिल की दर्द,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, हंसता रहूं,
अंदर से, रोता रहूं।

मौन की व्यथा, एक अनकही कहानी,
बोल न सकूं, तो क्या करूं।
सबके सामने, खुश दिखूं,
अंदर से, मरता रहूं।।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी 


Sukhmangal Singh

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