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*माता-पिता चारपाई पर*

 
*माता-पिता चारपाई पर*

माता-पिता चारपाई पर  हैं,
 जाने की खुशियां मना लो।
उनके चेहरे पर उदासी छाई है,
आंखों में आंसू भरे हैं।

बेटा दूर रह रहा है, उन्हें छोड़कर,
उनके दिल की धड़कनें बढ़ रही हैं।
वे सोचते हैं कि अब क्या होगा,
बेटे के बिना जीवन कैसा होगा।

माता-पिता ने बेटे को पाला है,
उसके लिए संघर्ष किया है।
उन्होंने उसे पढ़ाया, लिखा, और बढ़ाया है,
उनके सपने को पूरा करने के लिए।

अब बेटा बाहर रह रहा है, उन्हें छोड़कर,
उनके दिल की गहराइयों में दर्द है।
वे चाहते थे कि बेटा उनके पास रहे,
लेकिन वे जानते हैं कि यह संभव नहीं है।

माता-पिता की खुशियां बेटे के साथ हैं,
वे चाहते हैं कि बेटा खुश रहे।
वे उसकी सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं,
और उसकी खुशियों में अपनी खुशियां ढूंढते हैं।

बेटा दूर रह रहा है, लेकिन माता-पिता के दिल में,
उसके लिए  प्यार और स्नेह टूटता दिख रहा है।
वे उसकी यादों को छोड़ जाने वाले,
पर उसकी सफलता की हमेशा प्रार्थना करेंगे।

माता पिता चारपाई पर हैं 
जाने की खुशियां मना लो!
उनके चेहरे पर उदासी छाई हुई 
आंखों में आंसू भरे हैं।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
 वाराणसी वासी ,अवध निवासी 
Sukhmangal Singh




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