
| Sun, Oct 18, 1:59 PM (16 hours ago) | |||
| ||||
जय माता दी!
"माँ महागौरी - गीत"
गोरी है माँ गौरी, महिमा है गौरी अपार,
गौरी तन, गौरी मन, गौरी करती बेड़ा पार।
श्वेत है श्वेतांबरा, श्वेत है आचार,
श्वेत कर्म, श्वेत धर्म, देती श्वेत विचार।
शुद्धि से जो शुद्ध हुए, माँ देती वही शुद्धि,
बुद्धि से जो बुद्ध हुए, माँ देती वही बुद्धि।
शांति में है शांति, माँ की निर्मल शांति,
कांति में है कांति, मुख पर दिव्य कांति।
वृषभ पर सवार माँ, वृषभ सी अटल महान,
वृषभ धर्म धारिणी, करती जग कल्याण।
कर में डमरू धारिणी, हरती सबका डर,
डर को जो हर लेती, वही तो है अभय वर।
गंगा सी पावन है, गंगा सी धार,
गंगा बहती जटा में, माँ की ममता अपार।
हार पहन के आई माँ, हार नहीं है हार,
हार गए जो दंभ सभी, माँ ने किया संहार।
तार जो जोड़ दे मैया, वही सच्चा तार,
तार-तार दुख को कर, करती उद्धार।
मन का जो मैल हरे, वही तो है महागौरी,
जन-जन की पीर हरे, जय जय माँ गौरी।
धवल रूप धारिणी, धवल करे संसार,
धवल करे मन मेरा, दो ऐसा उपहार।
'मंगल' शरण तुम्हारी, सुन लो महागौरी माता,
लाया श्रद्धा सुमन, कर दो निर्मल मेरी काया।।
सुख मंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार
वाराणसी
Powered by Froala Editor


LEAVE A REPLY