" मन का मैल ना धोये कोई"
निम्नलिखित सम्मानित रचना :-
मन का मैल ना धोये कोई, धोये केवल काया
मन की गंदगी से बचने का नहीं कोई माया।
मन के अशुद्ध विचारों से बढ़कर कोई पाप नहीं
मन की शुद्धि के बिना कोई पूजा नहीं।
मन का मैल धोने के लिए आत्म-चिंतन जरूरी
मन की शुद्धि के लिए आत्म-संयम जरूरी।
मन को शुद्ध करने के लिए सत्य का मार्ग अपनाएं
मन की गंदगी से बचने के लिए अहिंसा का पालन करें।
मन का मैल धोने के लिए प्रेम और दया जरूरी
मन की शुद्धि के लिए क्षमा और सहनशक्ति जरूरी।
मन को शुद्ध करने के लिए आत्म-निरीक्षण जरूरी
मन की गंदगी से बचने के लिए सत्संग जरूरी।
मन का मैल धोने के लिए वैराग्य जरूरी
मन की शुद्धि के लिए त्याग और संयम जरूरी।
मन को शुद्ध करने के लिए भगवान का नाम जरूरी
मन की गंदगी से बचने के लिए गुरु की शरण जरूरी।
मन का मैल धोने के लिए आत्म-विश्वास जरूरी
मन की शुद्धि के लिए आत्म-निर्भरता जरूरी।।
- सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक,
वाराणसी वासी,
अवध निवासी
Sukhmangal Singh

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