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Dr. Srimati Tara Singh
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"क्रांति की धरा नेपाल"

 

 

"विश्व में स्वस्थ भावना की क्रांति"
 ओज-शैली में 
"क्रांति की धरा नेपाल"

उठो! हिमालय जाग चुका है, शंखनाद गूंजता है,  
विश्व में स्वस्थ भावना की, क्रांति की मशाल जलता है।  
धरती जहाँ बुद्ध ने ज्ञान, और जनक ने न्याय दिया,  
वही नेपाल आज फिर से, मानवता का गान गाए।  

ना भेद की दीवार यहाँ, ना जाति का बंधन है,  
भाई-भाई की भावना में, सारा जग वंदन है।  
करुणा की गंगा बहती, मैत्री की बयार चले,  
घृणा का अंधकार मिटे, प्रेम का उजियारा पले।  

पहाड़ों की छाती जितनी, विस्तृत यहाँ के दिल हैं,  
सेवा-सत्य-सद्भाव के, यहाँ अनमोल किल हैं।  
हाथ जोड़कर विश्व कहे, "आओ सीखें जीना",  
नेपाल से निकली क्रांति, जग को देगी जीना।  

टूटे मन को जोड़ देगी, रूठे जग को मनाएगी,  
वसुधैव कुटुम्बकम् का, स्वर नई दिशा लाएगी।  
युग बदलेगा, सोच बदलेगी, धरा नई मुस्काएगी,  
विश्व शांति की क्रांति, नेपाल से ही आएगी!!

- कवि सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी 

जय नेपाल, जय मानवता




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