काशी अर्थात वाराणसी:
काशी की धरती पर मैं खड़ा हूँ,
जहाँ गंगा नदी का पवित्र जल बहता है।
यहाँ की हवा में शिव की महिमा है,
और यहाँ की धरती पर प्राचीनता का संचार है।
काशी की गलियों में मैं खो जाता हूँ,
जहाँ प्राचीन मंदिरों की सुंदरता है।
यहाँ की दीवारों पर इतिहास के चित्र हैं,
और यहाँ की हवा में पौराणिक कथाओं का संचार है।
काशी के घाटों पर मैं बैठता हूँ,
जहाँ गंगा नदी का पवित्र जल बहता है।
यहाँ की सुंदरता में मैं खो जाता हूँ,
और यहाँ की पवित्रता में मैं शांति पाता हूँ।
काशी की धरती पर मैं खड़ा हूँ,
जहाँ शिव की महिमा है और गंगा का पवित्र जल बहता है।
यहाँ की हवा में प्राचीनता का संचार है,
और यहाँ की धरती पर पवित्रता का वास है।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी अवध निवासी
-- Sukhmangal Singh
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