काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी का बांका जिले में प्रथम अधिवेशन और मानद सम्मान समारोह 2025 ,शिक्षकों के लिए

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"बांका जिला" है। बांका जिला बिहार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और इसका मुख्यालय बांका शहर में है। आइए बांका जिले के बारे में विस्तार से जानते हैं:
*बांका जिले का इतिहास*
बांका जिले का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि दानवीर कर्ण को दुर्योधन ने यहां का राजा बनाया था। इसके अलावा, अंग प्रदेश का जिक्र बौद्ध धर्म-ग्रंथों और मगध के इतिहास में भी मिलता है।
*भौगोलिक स्थिति*
बांका जिला बिहार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और इसकी सीमा झारखंड राज्य से लगती है। जिले का कुल क्षेत्रफल 3,020 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 2,989.95 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण क्षेत्र और 30.05 वर्ग किलोमीटर शहरी क्षेत्र शामिल है।
*जनसंख्या और साक्षरता*
बांका जिले की जनसंख्या लगभग 20,34,763 है, जिसमें से 10,67,140 पुरुष और 9,67,623 महिलाएं हैं। जिले की साक्षरता दर 58.17% है।
*आर्थिक व्यवस्था*
बांका जिले की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। इसे बिहार के चावल का कटोरा कहा जाता है। यहां की मुख्य फसलों में चावल, गेहूं, मक्का और मसूर हैं। अमरपुर बेल्ट गन्ना का उत्पादन करता है और यहां गुड़ का भी उत्पादन होता है।
*पर्यटन स्थल*
बांका जिले में कई पर्यटन स्थल हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
- *मंदार पर्वत*: यह एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो सागर मंथन की पौराणिक गाथा से जुड़ा हुआ है।
- *पापहरणी सरोवर*: यह मंदार पर्वत के तल पर स्थित एक पवित्र सरोवर है।
- *लक्षदीप मंदिर*: यह एक प्राचीन मंदिर है, जो दीपावली पर एक लाख दीप जलाने की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
- *ओढ़नी डैम*: यह एक सुंदर डैम है, जहां बोटिंग और पिकनिक का आनंद लिया जा सकता है।
उम्मीद है, आपको बांका जिले के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी।
सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य किए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कार्य हैं:
*ग्रामीण विकास*
- *प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)*: ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क में सुधार करने और बस्तियों को जोड़ने के लिए।
- *जल जीवन मिशन (JJM)*: ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति प्रदान करने के लिए।
- *प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G)*: ग्रामीण क्षेत्रों में वंचितों को किफायती आवास प्रदान करने के लिए।
*जनजातीय विकास*
- *प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM JANMAN)*: जनजातीय परिवारों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने के लिए।
- *एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)*: जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए।
*शहरी विकास*
- *प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-U)*: शहरी क्षेत्रों में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को आवास सुविधा प्रदान करने के लिए।
- *स्वच्छ भारत मिशन (SBM)*: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और साफ-सफाई में सुधार करने के लिए।
- *अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT)*: शहरी क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए।
*रोजगार और कौशल विकास*
- *प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)*: बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए।
- *राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS)*: युवाओं को शिक्षुता प्रशिक्षण प्रदान करने और उनकी कौशल में सुधार करने के लिए।
- *फ्यूचर स्किल्स प्राइम*: आईटी कर्मियों को नई प्रौद्योगिकियों में कौशल प्रदान करने के लिए ।
बांका से बैजनाथ धाम की दूरी लगभग 68 किलोमीटर है, जो बांका जिले के मुख्यालय से देवघर की दूरी है। यह दूरी सड़क मार्ग द्वारा तय की जा सकती है।
बांका जाने के लिए बैजनाथ धाम से निम्नलिखित साधन मिलते हैं:
- *सड़क मार्ग*: देवघर से बांका तक सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है, जिसमें लगभग 2 घंटे लगते हैं।
- *बस सेवाएं*: देवघर से बांका तक बसें चलती हैं, जो नियमित अंतराल पर उपलब्ध होती हैं।
- *टैक्सी और ऑटो रिक्शा*: देवघर से बांका तक टैक्सी और ऑटो रिक्शा भी उपलब्ध होते हैं।
बैजनाथ धाम से बांका जाने के लिए कोई सीधी ट्रेन या हवाई सेवा नहीं है। इसलिए, सड़क मार्ग द्वारा यात्रा करना सबसे सुविधाजनक विकल्प है ।
बैजनाथ धाम एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर झारखंड के देवघर जिले में स्थित है, और इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। बैजनाथ धाम का महत्व इस प्रकार है ¹:
- *धार्मिक महत्व*: यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और इसे कामना लिंग भी कहा जाता है, जहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- *शक्तिपीठ*: बैजनाथ धाम एक शक्तिपीठ भी है, जहां माता सती का हृदय गिरा था, और इसे हृदयपीठ या हार्द पीठ के नाम से भी जाना जाता है।
- *आध्यात्मिक महत्व*: यह मंदिर आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, और यहां के परिसर में 22 मंदिर हैं, जिनमें भगवान शिव, माता पार्वती, और अन्य देवताओं की पूजा की जाती है।
बैजनाथ धाम की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार है ²:
- *स्थान*: देवघर, झारखंड, भारत
- *निकटतम हवाई अड्डा*: देवघर हवाई अड्डा (9 किमी दूर)
- *निकटतम रेलवे स्टेशन*: जसीडीह जंक्शन (7 किमी दूर)
- *निकटतम बस स्टैंड*: देवघर बस स्टैंड (2 किमी दूर)
हालांकि, बैजनाथ नामक एक अन्य मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में भी स्थित है, जो भगवान शिव को समर्पित है और अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है ।
सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य किए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कार्य हैं:
*ग्रामीण विकास*
- *प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)*: ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क में सुधार करने और बस्तियों को जोड़ने के लिए।
- *जल जीवन मिशन (JJM)*: ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति प्रदान करने के लिए।
- *प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G)*: ग्रामीण क्षेत्रों में वंचितों को किफायती आवास प्रदान करने के लिए।
*जनजातीय विकास*
- *प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM JANMAN)*: जनजातीय परिवारों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने के लिए।
- *एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)*: जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए।
*शहरी विकास*
- *प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-U)*: शहरी क्षेत्रों में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को आवास सुविधा प्रदान करने के लिए।
- *स्वच्छ भारत मिशन (SBM)*: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और साफ-सफाई में सुधार करने के लिए।
- *अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT)*: शहरी क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए।
*रोजगार और कौशल विकास*
- *प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)*: बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए।
- *राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS)*: युवाओं को शिक्षुता प्रशिक्षण प्रदान करने और उनकी कौशल में सुधार करने के लिए।
- *फ्यूचर स्किल्स प्राइम*: आईटी कर्मियों को नई प्रौद्योगिकियों में कौशल प्रदान करने के लिए ।
बांका जिले की सांस्कृतिक विरासत बहुत समृद्ध है। यह जिला अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, और यहाँ की संस्कृति में पौराणिक कथाओं और प्राचीन इतिहास की गहरी जड़ें हैं।
*बौंसी मेला*
बांका जिले में आयोजित होने वाला बौंसी मेला एक प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसे राजकीय महोत्सव का दर्जा प्राप्त है। इस मेले में देश के नामचीन कलाकारों ने समय-समय पर प्रदर्शन किया है, और यह मेला सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
*मंदार पर्वत*
मंदार पर्वत बांका जिले का एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो पौराणिक कथाओं में वर्णित समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
*कला और शिल्प*
बांका जिले की कला और शिल्प में मधुबनी चित्रकला जैसी पारंपरिक कलाएं शामिल हैं, जो अपनी विशिष्ट शैली और रंग संयोजन के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा, यहाँ की कला और शिल्प में पौराणिक कथाओं और प्राचीन इतिहास की झलक देखी जा सकती है।
*सांस्कृतिक महत्व*
बांका जिले की सांस्कृतिक विरासत न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह जिले की पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को भी दर्शाती है। यह जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, और यहाँ की संस्कृति में पौराणिक कथाओं और प्राचीन इतिहास की गहरी जड़ें।
बिहार में "हस्तिनापुर जिला" नहीं है, बल्कि "बांका जिला" है। बांका जिला बिहार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और इसका मुख्यालय बांका शहर में है। आइए बांका जिले के बारे में विस्तार से जानते हैं:
*बांका जिले का इतिहास*
बांका जिले का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि दानवीर कर्ण को दुर्योधन ने यहां का राजा बनाया था। इसके अलावा, अंग प्रदेश का जिक्र बौद्ध धर्म-ग्रंथों और मगध के इतिहास में भी मिलता है।
*भौगोलिक स्थिति*
बांका जिला बिहार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और इसकी सीमा झारखंड राज्य से लगती है। जिले का कुल क्षेत्रफल 3,020 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 2,989.95 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण क्षेत्र और 30.05 वर्ग किलोमीटर शहरी क्षेत्र शामिल है।
*जनसंख्या और साक्षरता*
बांका जिले की जनसंख्या लगभग 20,34,763 है, जिसमें से 10,67,140 पुरुष और 9,67,623 महिलाएं हैं। जिले की साक्षरता दर 58.17% है।
*आर्थिक व्यवस्था*
बांका जिले की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। इसे बिहार के चावल का कटोरा कहा जाता है। यहां की मुख्य फसलों में चावल, गेहूं, मक्का और मसूर हैं। अमरपुर बेल्ट गन्ना का उत्पादन करता है और यहां गुड़ का भी उत्पादन होता है।
*पर्यटन स्थल*
बांका जिले में कई पर्यटन स्थल हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
- *मंदार पर्वत*: यह एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो सागर मंथन की पौराणिक गाथा से जुड़ा हुआ है।
- *पापहरणी सरोवर*: यह मंदार पर्वत के तल पर स्थित एक पवित्र सरोवर है।
- *लक्षदीप मंदिर*: यह एक प्राचीन मंदिर है, जो दीपावली पर एक लाख दीप जलाने की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
- *ओढ़नी डैम*: यह एक सुंदर डैम है, जहां बोटिंग और पिकनिक का आनंद लिया जा सकता है।
उम्मीद है, आपको बांका जिले के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी।
30 सितंबर 2025 को बांका जिले की हस्तिनापुर में तेज नारायण बद्रिका पर्यावरण अनुसंधान केंद्र हस्तिनापुर शंभूगंज बांका बिहार में काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले विद्युत जनों का हार्दिक स्वागत करें और क्षेत्र के शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट समर्पण और योगदान के लिए विद्या- वाचस्पति और विद्यासागर मानद सम्मान 2025 प्राप्त करने वाले लोगों का स्वागत करें। इस कार्यक्रम में काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी के कुलाधिपति डॉ सुखमंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक , काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी के संरक्षक वरिष्ठ समाजसेवी श्री प्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश जी तथा कुलपति डॉ. संभाजी राजाराम बाविस्कर की उपस्थिति का स्वागत करें।
बिहार में काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी द्वारा आयोजित प्रथम कार्यक्रम होने वाला है।
इस कार्यक्रम से शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वालों का मनोबल बढ़ेगा और मेहनत के साथ समर्पण के साथ लोग बच्चों नौजवानों को शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध दिलाने में मददगार साबित होगा।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
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