Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

कर्मों की बगिया सुनसान

 
कर्मों की बगिया सुनसान

कर्मों की बगिया सुनसान जगह बाचाल चमन चमचमा रहा है,
कहां गए वे लोग जो सीना तान कर चलते थे।
अब तो सब कुछ बदल गया है, हर तरफ हाहाकार है,
कर्मों की बगिया में अब कांटे ही कांटे हैं।

अंतस कलुषित, कलंक कुटिल, सब कुछ बदल गया है,
वैज्ञानिक और महंत, कहां गए वे लोग।
अब तो सब कुछ व्यर्थ लगता है, हर तरफ अंधकार है,
कर्मों की बगिया में अब प्रकाश नहीं है।

हर तरफ गुस्से की आग है, हर दिल में जहर भरा है,
अब तो सब कुछ बर्बाद हो गया है, कुछ नहीं बचा है।
कर्मों की बगिया में अब फूल नहीं खिलते,
अब तो सब कुछ कंटकित हो गया है।

वैज्ञानिक और महंत, वे लोग कहां गए,
जो ज्ञान और प्रेम की बातें करते थे।
अब तो सब कुछ बदल गया है, हर तरफ अंधकार है,
कर्मों की बगिया में अब प्रकाश नहीं है।

कर्मों की बगिया सुनसान जगह बाचाल चमन चमचमा रहा है,
अब तो सब कुछ बदल गया है, कुछ नहीं बचा है।
हर तरफ हाहाकार है, हर दिल में दर्द है,
कर्मों की बगिया में अब फूल नहीं खिलते।
कर्मों की बगिया सुनसान जगह बाचाल चमन चमचमा रहा है,
कहां गए वे लोग जो सीना तान कर चलते थे।
अब तो सब कुछ बदल गया है, हर तरफ हाहाकार है,
कर्मों की बगिया में अब कांटे ही कांटे हैं।

अंतस कलुषित, कलंक कुटिल, सब कुछ बदल गया है,
वैज्ञानिक और महंत, कहां गए वे लोग।
अब तो सब कुछ व्यर्थ लगता है, हर तरफ अंधकार है,
कर्मों की बगिया में अब प्रकाश नहीं है।

हर तरफ गुस्से की आग है, हर दिल में जहर भरा है,
अब तो सब कुछ बर्बाद हो गया है, कुछ नहीं बचा है।
कर्मों की बगिया में अब फूल नहीं खिलते,
अब तो सब कुछ कंटकित हो गया है।

वैज्ञानिक और महंत, वे लोग कहां गए,
जो ज्ञान और प्रेम की बातें करते थे।
अब तो सब कुछ बदल गया है, हर तरफ अंधकार है,
कर्मों की बगिया में अब प्रकाश नहीं है।

कर्मों की बगिया सुनसान जगह बाचाल चमन चमचमा रहा है,
अब तो सब कुछ बदल गया है, कुछ नहीं बचा है।
हर तरफ हाहाकार है, हर दिल में दर्द है,
कर्मों की बगिया में अब फूल नहीं खिलते, और नहीं है।

अब तो बस एक ही सवाल है, क्या होगा आगे,
कर्मों की बगिया का क्या होगा भविष्य।
क्या फिर से खिलेंगे फूल, या और भी बिगड़ेगा,
कर्मों की बगिया की कहानी क्या होगी आगे।।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी 
अवध निवासी 


Sukhmangal Singh

Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ