अगर कलम रूठ जाए तो, शब्द नहीं आते हैं,
पेज पर स्याही नहीं होती, भाव नहीं आते हैं।
कलम की धार जब सूख जाए, तो लिखना मुश्किल हो जाता है,
शब्दों का संगम नहीं होता, तो कविता नहीं आती है।
कलम की नोक जब तिरछी हो, तो लिखना नहीं आता है,
शब्दों का अर्थ नहीं समझ आता, तो कविता नहीं आती है।
कलम की शक्ति जब कम हो, तो लिखना नहीं आता है,
शब्दों का जादू नहीं चलता, तो कविता नहीं आती है।
कलम को जब स्याही नहीं मिले, तो लिखना नहीं आता है,
शब्दों का रंग नहीं आता, तो कविता नहीं आती है।
कलम की रूठने की आदत है, तो लिखना नहीं आता है,
शब्दों का संगम नहीं होता, तो कविता नहीं आती है।
कलम को मनाना पड़ता है, तो लिखना आता है,
शब्दों का संगम होता है, तो कविता आती है।।
- सुख मंगल सिंह
Sukhmangal Singh
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