जो कभी कहा नहीं, वो बातें दिल में हैं,
जो कभी सुना नहीं, वो आवाज़ें दिल में हैं।
जो कभी देखा नहीं, वो नज़ारे दिल में हैं,
जो कभी महसूस नहीं, वो एहसास दिल में हैं।
जो कभी कहा नहीं, वो शब्द दिल में हैं,
जो कभी लिखा नहीं, वो कहानियाँ दिल में हैं।
जो कभी सोचा नहीं, वो ख़यालात दिल में हैं,
जो कभी जाना नहीं, वो राज़ दिल में हैं।
जो कभी कहा नहीं, वो प्यार दिल में है,
जो कभी जताया नहीं, वो एहतराम दिल में है।
जो कभी दिखाया नहीं, वो दर्द दिल में है,
जो कभी बताया नहीं, वो सच दिल में है।
जो कभी कहा नहीं, वो ख़ामोशी दिल में है,
जो कभी सुना नहीं, वो सन्नाटा दिल में है।
जो कभी देखा नहीं, वो अंधेरा दिल में है,
जो कभी महसूस नहीं, वो तन्हाई दिल में है।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी
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