न्याय और अधिकारों की रक्षा के बारे में एक कविता इस प्रकार है:
जो भी जनता का हक खाएगा,
न्यायालय की शरण में आयेगा।
वहां सच्चाई का होगा सामना,
और न्याय के तराजू में तौला जाएगा।
जो भी अन्याय करेगा, उसे भुगतना पड़ेगा,
और न्यायालय के फैसले का पालन करना होगा।
न्यायालय की भूमिका है न्याय करना,
और जनता के अधिकारों की रक्षा करना।
न्यायालय में सच्चाई की जीत होगी,
और अन्याय का अंत होगा।
जो भी जनता का हक खाएगा,
उसे न्यायालय की सजा भुगतनी पड़ेगी।
न्यायालय की शरण में आने वाले सभी को,
न्याय और सच्चाई का सामना करना होगा।
न्यायालय का फैसला अंतिम होगा,
और सभी को उसका पालन करना होगा।
न्याय और सच्चाई की जीत होगी,
और अन्याय का अंत होगा।
न्यायालय की भूमिका है न्याय करना,
और जनता के अधिकारों की रक्षा करना।।
- सुख मंगल सिंह
कुलाधिपति
काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी
दिनांक 20,9,2025
Sukhmangal Singh
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