"जीवन के रंग खुशियों के संग"
जीवन रंगों का मेला है, धूल में भी फूल खिलेंगे,
गम की काली रात ढलेगी, खुशियों के दीप जलेंगे॥
धूप लगे तो धूप से लड़ ले, छाँव मिले तो गीत गा ले,
तूफाँ आए तो सीना तान ले, गिरकर भी मंज़िल पा ले॥
मिट्टी से बना इंसां तू, मिट्टी में ही मिल जाएगा,
पर जब तक साँसें चलती हैं, हँसते-हँसते जी पाएगा॥
काँटों में भी राह बनाए, पथरों को पानी कर दे,
निराशा की दीवार गिरा दे, उम्मीदों का परचम फहरा दे॥
रंग जो बिखरे आँगन में, वो तेरी मेहनत की लाली,
आँसू जो गिरे हों गालों पे, वो तेरी जीत की ताली॥
हार मत मान तू पथिक, हर मोड़ पे नया सवेरा है,
जीवन के रंग खुशियों संग, हर पल में उत्सव घेरा है॥
मुट्ठी बाँध के चल तू आगे, किस्मत भी घुटने टेकेगी,
जो जिएगा रंग भर के जीवन, दुनिया वही के गीत गाएगी॥
- कवि सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी
Sukhmangal Singh
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