Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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जवन माई आपन रहली

 

जवन माई आपन रहली जवमवली तन से।

माई क स्नेहिया भुलाई नाही मन से।।
चूम चूम होठवा से होठ सीचें मैं माई।
हमरे जीयत कई से फूल मुरझाई।।

बेनी क बतास रोके कठिन जतन से।
जवन माई आपन रहली जन्मावलीन तन से।।
अंखियां के कजरा से मथवा सजावै।
कोई तोनहिनिया न टोनवा लगावै।।

रुके नहीं आंसू माई अनपढ़ के नयन से।
जवन माई आपन रहली जनमवली  तन से।।
तेज बली अनपढ़ 
टकटकपुर, भीकमपुर चकिया चंदौली 
संकलन करता: सुख मंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी 


Sukhmangal Singh

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