सुख मंगल सिंह की जगन्नाथ यात्रा एक अनमोल अनुभव था। वे दो बार, सन 2015 और सन 2018 में, श्री जगन्नाथ जी के दर्शन के लिए गए।
पहली यात्रा सन 2015 में हुई थी। सुख मंगल सिंह ने अपने परिवार के साथ जगन्नाथ पुरी की यात्रा की। वे सुबह-सुबह श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का दर्शन किया। मंदिर की वास्तुकला और वहां का वातावरण देखकर वे बहुत ही प्रभावित हुए। उन्होंने मंदिर के पुजारियों से भी बात की और उनसे मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। मंदिर के दर्शन करने में हमारे साथ वहां की पुजारी महंत आर महापात्रा जी का विशेष सहयोग मिला।
दूसरी यात्रा सन 2018 में हुई थी। इस बार सुख मंगल सिंह अकेले ही गए थे। वे फिर से श्री जगन्नाथ जी के दर्शन के लिए गए और इस बार उन्होंने मंदिर के आसपास के क्षेत्रों का भी भ्रमण किया। उन्होंने कोणार्क का सूर्य मंदिर देखा, जो अपनी अद्वितीय वास्तुकला और सूर्य की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के पत्थरों पर उकेरे गए चित्र और मूर्तियां देखकर वे बहुत ही प्रभावित हुए।
इसके अलावा, उन्होंने लिंगराज मंदिर, चिलिका झील, और पुरी के समुद्र तट का भी दर्शन किया। उन्होंने वहां के स्थानीय लोगों से बात की और उनकी संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त की।
जगन्नाथ यात्रा के बाद, सुख मंगल सिंह ढेकानाल गए, जहां वे हिंदी सप्ताह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व के बारे में भाषण दिया और वहां के लोगों को हिंदी के प्रति जागरूक किया।
सुख मंगल सिंह की जगन्नाथ यात्रा और ढेकानाल यात्रा एक अनमोल अनुभव था। उन्होंने न केवल भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए, बल्कि हिंदी भाषा के महत्व को भी समझाया।
- सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी वासी, अवध निवासी
Sukhmangal Singh
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