*हुनर की पहचान*
हुनर हो तो उसको अमल में लाना होगा,
जोरू जमीन से अतिक्रम को हटाना होगा।
हुनर की पहचान है, जीवन की राह में,
सफलता की कुंजी है, कठिनाइयों की छांह में।
हुनर को सीखना है, जीवन को सजाने के लिए,
आगे बढ़ना है, अपने सपनों को पूरा करने के लिए।
जोरू जमीन की समस्या है, हमारे समाज में,
अतिक्रम की वजह से, हमारा जीवन दूभर हो गया है।
हुनर के साथ, हमें आगे बढ़ना होगा,
जोरू जमीन से अतिक्रम को हटाना होगा।
हुनर की शक्ति से, हमारा जीवन सुधरेगा,
आगे बढ़ने से, हमारा समाज सुधरेगा।
हुनर को सीखना है, जीवन को सफल बनाने के लिए,
आगे बढ़ना है, अपने सपनों को पूरा करने के लिए।
*हुनर की परीक्षा*
हुनर जो है उसको भी हमें आजमाना होगा,
डाका डालने वाले को रास्ते से निकाला होगा।
हुनर की पहचान है, जीवन की राह में,
सफलता की कुंजी है, कठिनाइयों की छांह में।
हुनर को सीखना है, जीवन को सजाने के लिए,
आगे बढ़ना है, अपने सपनों को पूरा करने के लिए।
डाका डालने वाले को, रास्ते से हटाना होगा,
हुनर की शक्ति से, आगे बढ़ना होगा।
हुनर की परीक्षा है, जीवन की लड़ाई में,
सफलता की राह है, कठिनाइयों की छांह में।
हुनर को आजमाना है, जीवन को सफल बनाने के लिए,
आगे बढ़ना है, अपने सपनों को पूरा करने के लिए।
हुनर की शक्ति से, हमारा जीवन सुधरेगा,
आगे बढ़ने से, हमारा समाज सुधरेगा।
हुनर को सीखना है, जीवन को सजाने के लिए,
आगे बढ़ना है, अपने सपनों को पूरा करने के लिए।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी,
अवध निवासी हैं
Sukhmangal Singh
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