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Dr. Srimati Tara Singh
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"हिंदी के प्रति हमारा दायित्व "

 
"हिंदी के प्रति हमारा दायित्व "

हिंदी ने हमें सब कुछ दिया, अब बारी हमारी है,
इस ऋण को चुकाने की जिम्मेदारी हमारी है।
पहला दायित्व यही, इसे मन से अपनाएं,
हीन भाव छोड़ें, गर्व से हिंदी गुनगुनाएं।

घर में बच्चों को हिंदी की लोरी सुनाएं,
दिनकर, महादेवी के साहित्य से मिलवाएं।
 दूसरा दायित्व, हिंदी में हस्ताक्षर करें,
दुकान, प्रतिष्ठान के बोर्ड हिंदी में लिखें।

व्हाट्सएप, फेसबुक पर हिंदी में ही लिखें,
तीसरा दायित्व, शुद्ध हिंदी बोलने का यत्न करें।
हिंग्लिश के दिखावे से खुद को मुक्त करें,
चौथा दायित्व, हिंदी पुस्तकें खरीदें और पढ़ाएं।

लेखक का सम्मान बढ़ाएं, उसे भूखा न मरने दें,
पांचवां दायित्व, हिंदी को रोजगार से जोड़ें।
नौकरी में हिंदी वालों के लिए द्वार न मोड़ें,
छठा दायित्व, दूसरी भाषाओं का भी मान करें।

पर अपनी मातृभाषा का अपमान न सहें,
याद रहे, भाषा गई तो संस्कृति भी जाएगी।
हिंदी बची तो ही यह पीढ़ी बची रह पाएगी,
प्रतिज्ञा करें, हिंदी को अमर बनाएंगे,सच्चा दायित्व निभाएंगे।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी 

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