Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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हमें चलना होगा!

 
स्वाद नीक ना लगा से पहले, कान बहने लगा।
बात अच्छी न लगती तो, ले अनसुनी फिजा।।
मन के दरवाजे बंद कर, मत सुनो कुछ भी।
बाहर की आवाजों से, दिल को न दो टूटने का बहाना।

हर एक की अपनी सोच है, अपनी अपनी धारा।
कोई नहीं जानता, क्या सही है, क्या गलत है सारा।
जीवन की राहों में, हमें चलना है साथ में।
एक दूसरे के साथ से, ही बनता है परिवार का नाता।

हर एक की अपनी कहानी, अपनी अपनी तकदीर।
कोई नहीं जानता, कल क्या होगा, आज की रात में।
लेकिन हमें जीना है, हर एक पल को।
अपने दिल की सुनकर, और अपनों के लिए जीकर।

जीवन की यात्रा में, हमें मिलते हैं कई लोग।
कुछ दोस्त बनते हैं, कुछ रास्ते में खो जाते हैं।
लेकिन जो साथ रहते हैं, वो दिल के करीब होते हैं।
उनके लिए ही तो, जीवन है ये, वरना क्या है जीना।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी 
 अवध निवासी 


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