हाड़ मांस की काया पर करोड़ों लुटाता आया,
धरा को जो माता कहलाती, सोच न बढ़ाया।
मैंने धन और वैभव की खोज में जीवन बिताया,
लेकिन कभी नहीं सोचा कि माता की कृपा कितनी अनमोल है।
मां ने मुझे जन्म दिया, मुझे पाला-पोसा,
मेरे हर कदम पर मेरा साथ दिया।
लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा कि माता की महिमा कितनी महान है,
मैंने बस अपने स्वार्थ में जीवन बिताया।
मां की कृपा से मुझे सब कुछ मिला,
लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा कि माता की कृपा कितनी अनमोल है।
मैंने माता की पूजा की, लेकिन कभी नहीं सोचा कि माता की महिमा कितनी महान है,
मैंने बस अपने स्वार्थ में जीवन बिताया।
अब मैं समझता हूँ कि माता की कृपा कितनी अनमोल है,
अब मैं जानता हूँ कि माता की महिमा कितनी महान है।
मैं माता की कृपा के लिए आभारी हूँ,
मैं माता की महिमा को समझने की कोशिश करूँगा।
*धरती मां के लिए प्यार*
धरती मां हमें जन्म देती है, हमें पालती है, और हमें अपने संसाधनों से समृद्ध बनाती है। लेकिन क्या हमने धरती मां के लिए कुछ किया है? क्या हमने उसके लिए अपना प्यार दिखाया है?
*धरती मां के लिए कुछ करना*
हमें धरती मां के लिए कुछ करना चाहिए। हमें उसकी रक्षा करनी चाहिए, उसके संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए, और उसके लिए अपना प्यार दिखाना चाहिए। हमें धरती मां को स्वच्छ और हरा-भरा रखने के लिए काम करना चाहिए।
*धरती मां के लिए प्यार दिखाने के तरीके*
हमें धरती मां के लिए प्यार दिखाने के कई तरीके हैं:
- *पेड़ लगाना*: पेड़ लगाने से धरती मां को ऑक्सीजन मिलती है और वातावरण शुद्ध होता है।
- *कूड़ा न फैलाना*: कूड़ा न फैलाने से धरती मां स्वच्छ रहती है और प्रदूषण कम होता है।
- *जल संरक्षण*: जल संरक्षण से धरती मां के जल संसाधनों का संरक्षण होता है।
- *धरती मां की रक्षा*: धरती मां की रक्षा करने से उसके संसाधनों का संरक्षण होता है और वह स्वस्थ रहती है।
*निष्कर्ष*
हमें धरती मां के लिए अपना प्यार दिखाना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए। हमें धरती मां को स्वच्छ और हरा-भरा रखने के लिए काम करना चाहिए। धरती मां के लिए प्यार दिखाने से हम उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी
Sukhmangal Singh
![]() |
Powered by Froala Editor


LEAVE A REPLY