मेरी खिड़की पर रोज़ आती है गौरैया,
उसकी चहचहाहट से जगती है सुबह की रौनक।
वह अपने पंखों को फड़फड़ाती है,
और अपनी छोटी सी चोंच से दाना चुगती है।
उसके पंखों का रंग भूरा और सफेद है,
उसकी आँखें चमकती हैं जैसे तारे।
वह अपनी चहचहाहट से मुझे जगाती है,
और मैं उसकी आवाज़ में खो जाता हूँ।
गौरैया की यात्रा रोज़ मेरी खिड़की पर होती है,
वह मुझे प्रकृति की सुंदरता की याद दिलाती है।
उसकी छोटी सी दुनिया में भी खुशी है,
और वह मुझे सिखाती है कि जीवन में छोटी-छोटी चीजों में भी आनंद है।
*गौरैया की यात्रा* एक कविता है जो गौरैया की सुंदरता और उसकी चहचहाहट का वर्णन करती है। यह कविता प्रकृति की सुंदरता और जीवन की छोटी-छोटी चीजों में आनंद को दर्शाती है।
*गौरैया की खुशी*
अमरूद के पेड़ की डालियों पर,
गौरैया आती है चहचहाती।
फल खाती है मीठे और पके हुए,
उसकी खुशी में डूब जाती है बाग़ की हरियाली।
उसकी छोटी सी चोंच में,
अमरूद का स्वाद आता है।
वह चहचहाती है खुशी से,
उसकी आवाज़ में मिठास घुलती है।
गौरैया की खुशी में,
प्रकृति की सुंदरता झलकती है।
वह अमरूद के पेड़ के साथ,
एक सुंदर तस्वीर बनाती है।
*गौरैया और अमरूद* एक सुंदर जोड़ी है,
जो प्रकृति की सुंदरता को दर्शाती है।
गौरैया की खुशी और अमरूद का स्वाद,
एक दूसरे के पूरक हैं।
*गौरैया की दिनचर्या*
बगल में कंडाल से पानी भी पीने जब तक जाती गौरैया,
उसकी छोटी सी दुनिया में भी एक अनोखी सुंदरता है।
वह पानी पीती है और अपनी प्यास बुझाती है,
फिर अमरूद के पेड़ पर जाती है और फल खाती है।
गौरैया की दिनचर्या में पानी पीना और फल खाना शामिल है,
वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इधर-उधर जाती है।
उसकी छोटी सी चोंच और पंख उसे हर जगह ले जाते हैं,
वह अपनी दुनिया में खुश और संतुष्ट रहती है।
गौरैया की कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी है,
और हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।
गौरैया की तरह हमें भी अपनी दुनिया में खुश और संतुष्ट रहना चाहिए।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार
Sukhmangal Singh
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