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घटस्थापना का गीत

 

प्रथम दिन घटस्थापना पर:-


घटस्थापना का गीत

आओ रे आओ नवरात्रि आई, घर-घर खुशहाली लाई,
घटस्थापना की शुभ घड़ी ने, मन में ज्योति जलाई।
मिट्टी का घट पवित्र है, इसमें ब्रह्मा का वास है,
जौ के अंकुर फूटेंगे, यही सृष्टि का आभास है।

प्रथम रूप शैलपुत्री का, पर्वतराज की बेटी है,
हाथ त्रिशूल विराजे, माँ शेरों वाली सजती है।
लाल चुनर, लाल चूड़ी, माँ को अति भाती है,
जोत जले अखंड घर में, माँ दौड़ी आती है।

हे माँ आओ बैठो, मेरे नैनों में वास करो,
जो हैं दीन दुखी जग में, उनका तुम उद्धार करो।
नौ दिन तक व्रत करेंगे, तेरी महिमा गायेंगे,
मन से जिसके निर्मल होगा, उसको दरश दिखायेंगे।

ढोल नगाड़े बाज रहे हैं, माँ की जय-जयकार है,
माँ के बिना सूना लगता, ये सारा संसार है।
दमयंती के आँगन में, माँ ने डेरा डाला है,
राज श्री साहित्य संगम ने, तुम्हें आज पुकारा है।
जय माता दी, जय माता दी, गूंज रहा है नारा
घटस्थापना से पूर्ण हो, शारदीय नवरात्रि सारा।।

-  सुख मंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार 
   वाराणसी 


Sukhmangal Singh

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