Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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एक चिट्ठी भारत माँ के नाम

 
एक चिट्ठी भारत माँ के नाम


हे ! भारत माँ तेरे चरणों में शीश झुकाएं,
तेरी मिट्टी का कण-कण हमको देवता बताए।
हिमालय मुकुट पहने गंगा तेरे पाँव पखारे,  
खेतों में लहराए फसल तेरा आँचल महकाए।  

तेरे लाल शहीद हुए सीमा पर जान गवाए, 
उनकी शहादत से तिरंगा गर्व से लहराए। 
तेरी भाषा हिंदी विश्व में सलाम पहुँचाए, 
यही मिशन लेकर हम गाँव-गाँव अलख जगाएँ । 

तेरे मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे सब एक समान,
विविधता में एकता तेरा सबसे बड़ा वरदान । 
तेरे बेटे विदेशों में तेरा नाम रोशन करें,  
तेरी जय-जयकार गूँजे सातों सागर पार करें।  

हे माँ तेरे कर्ज़दार हैं हम जन्म-जन्म तक , 
तेरी सेवा में तन-मन-धन सब अर्पण कर जाएँ।  
जब तक साँस चले तेरी गोद में जी जाएँ , 
तेरे माथे की बिंदी बनकर जग में चमक जाएँ ।। 

- डॉ. सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी 

गीत: "हिंदी का सलाम पूरे विश्व में पहुँचे" 



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