*डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन: अमेरिका के लिए सबसे कठिन दौर?*
जब हम 2025 की सर्दियों में पीछे मुड़कर देखते हैं, तो कई विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल अमेरिका के इतिहास में एक “सबसे कठिन दौर” के रूप में याद किया जाएगा। यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि कई मापदंडों पर आधारित एक तथ्यात्मक आकलन है।
1. आर्थिक अस्थिरता – टैरिफ और व्यापार युद्ध
ट्रंप की “अमेरिका प्रथम” नीति ने विश्व व्यापार के नियमों को उलट‑पलट कर दिया। 2025 में लागू हुए 50 % तक के स्टील टैरिफ ने न केवल उपभोक्ता कीमतों को बढ़ाया, बल्कि उत्पादन लागत को भी असहज बना दिया। OECD की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण अमेरिकी जीडीपी की वृद्धि 2.2 % से घटकर 1.6 % रह गई, और कई उद्योगों में आत्मविश्वास का स्तर गिरा ¹ ²।
_परिणाम:_
- आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं, जिससे महंगाई में उछाल आया।
- छोटे‑मध्यम व्यवसायों को कच्चे माल की लागत में अचानक वृद्धि का सामना करना पड़ा।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जिससे कई कंपनियों ने उत्पादन को पुनः स्थानीय बनाने की योजना बनाई।
2. सरकारी शटडाउन – राजनीतिक गतिरोध का प्रतीक
ट्रंप के कार्यकाल में तीन बार सरकारी शटडाउन हुए, जिनमें से सबसे हालिया 2025 के अक्टूबर‑नवंबर में हुआ। इस दौरान 7.5 लाख से अधिक संघीय कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेजा गया, और कई आवश्यक सेवाएँ ठप हो गईं ³ ⁴।
_परिणाम:_
- सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और खाद्य सहायता कार्यक्रमों में कटौती ने लाखों अमेरिकियों को सीधे प्रभावित किया।
- आर्थिक गतिविधियों में अस्थायी गिरावट, जिससे रोजगार बाजार पर दबाव बढ़ा।
- अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास कम हुआ, जिससे डॉलर की स्थिरता पर सवाल उठे।
3. वीजा नीति – प्रतिभा का बहिर्गमन
ट्रंप प्रशासन ने एच‑1बी वीजा की फीस को 1 लाख डॉलर तक बढ़ा दिया और कई वर्कर वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया। इस कदम ने भारतीय आईटी पेशेवरों सहित कई उच्च‑कुशल कर्मचारियों को अमेरिका छोड़ने या आवेदन न करने के लिए मजबूर किया ⁵।
_परिणाम:_
- तकनीकी उद्योग में कौशल की कमी, जिससे नवाचार की गति धीमी हुई।
- भारतीय छात्रों और पेशेवरों का प्रवाह घटा, जिससे दो‑देशीय संबंधों में तनाव बढ़ा।
- अमेरिकी कंपनियों को वैकल्पिक भर्ती स्रोत खोजने में अतिरिक्त लागत उठानी पड़ी।
4. विदेश नीति और वैश्विक प्रतिमा
Pew Research Center की 2025 की सर्वीक्षण में 24 देशों में से 19 में ट्रंप को विश्व मामलों में विश्वसनीय नेता नहीं माना गया ⁶। साथ ही, पश्चिमी देशों ने भी ट्रंप की “अमेरिका प्रथम” नीति के कारण अलग‑अलग रणनीतिक रास्ते अपनाने शुरू कर दिए ⁷।
_परिणाम:_
- NATO फंडिंग को लेकर विवाद, जिससे सामूहिक सुरक्षा में खटास आई।
- चीन‑भारत‑रूस जैसे देशों के साथ अमेरिका के संबंधों में ठंडक, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन बदल गया।
- अमेरिकी ब्रांड और सांस्कृतिक प्रभाव में गिरावट, जिससे शैक्षणिक एवं व्यावसायिक सहयोग पर असर पड़ा।
5. सामाजिक‑राजनीतिक विभाजन
ट्रंप की ध्रुवीकरणकारी शैली ने अमेरिकी समाज को गहरी रेखाओं में बांट दिया। सर्वेक्षणों में 55 % अमेरिकियों ने कहा कि ट्रंप “खतरनाक तानाशाह” जैसा व्यवहार कर रहे हैं, जबकि 60 % ने आर्थिक असमानता में वृद्धि का आरोप लगाया ²।
_परिणाम:_
- मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर लगातार झड़पें, जिससे सार्वजनिक विश्वास कम हुआ।
- न्यायिक और विधायी संस्थाओं पर दबाव बढ़ा, जिससे संस्थागत स्वतंत्रता पर सवाल उठे।
- नागरिक आंदोलन और विरोध प्रदर्शन नियमित हो गए, जिससे सामाजिक स्थिरता पर दबाव बना रहा।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल कई मायनों में “सबसे कठिन दौर” के रूप में देखा जा रहा है। आर्थिक अस्थिरता, सरकारी शटडाउन, कठोर वीजा नीतियाँ, अंतरराष्ट्रीय प्रतिमा में गिरावट और गहरा सामाजिक‑राजनीतिक विभाजन—इन सभी ने मिलकर अमेरिका को एक जटिल, अनिश्चित स्थिति में डाल दिया है।
हालांकि, इतिहास अक्सर बताता है कि कठिनाइयाँ परिवर्तन की बीज भी बोती हैं। यदि भविष्य की नीतियों में संतुलन और सहयोग की दिशा में कदम उठाए जाएँ, तो यह दौर भी एक नई पुनरुत्थान की शुरुआत बन सकता है।
स्रोत: ¹ ² ³ ⁴ ⁵ ⁶ ⁷(निम्नलिखित है)
*डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का भारत‑के‑प्रति रवैया – एक मिश्रित तस्वीर*
पहले कार्यकाल में ट्रंप ने भारत को “सबसे कठोर टैरिफ” की श्रेणी में डालते हुए 25 % तक आयात शुल्क लगाया, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में तनाव बढ़ा । साथ ही, रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर अतिरिक्त 50 % शुल्क की घोषणा ने भारत‑अमेरिका संबंधों को “दुश्मनी” की ओर धकेल दिया, जैसा कि फरीद ज़कारिया ने चेतावनी दी । इस दौरान अमेरिकी राजनयिकों की दशकों की मेहनत “मिट्टी में मिल गई” कहा गया ।
हालाँकि, 2025 के मध्य‑अंत में ट्रंप का स्वर बदलता दिखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत‑अमेरिका के “बहुत अच्छे” संबंधों की बात की और व्यापार बाधाओं को हटाने की इच्छा व्यक्त की । व्हाइट हाउस ने भी पीएम मोदी को “महान नेता” कहा, जिससे संकेत मिला कि प्रशासन अब सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाना चाहता है ⁴।
*विशेषज्ञों की राय*
- फरीद ज़कारिया और कई अमेरिकी विश्लेषकों ने कहा कि ट्रंप की आक्रामकता ने 25 साल की प्रगति को उलट दिया ।
- पूर्व राजनयिक जावेद अशरफ ने ट्रंप के नरम हुए रवैये का स्वागत किया, पर साथ ही कहा कि भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को समझना अभी बाकी है ⁶।
*संभावित भविष्य*
ट्रंप का रुख अभी भी “मिश्रित संकेत” देता है—एक ओर टैरिफ का दबाव, तो दूसरी ओर दोस्ती की बात। यदि टैरिफ हटाए जाते हैं और दोनों पक्ष रणनीतिक सहयोग (रक्षा, चिप, ऊर्जा) को प्राथमिकता देते हैं, तो संबंध फिर से संतुलन की ओर लौट सकते हैं। लेकिन अगर “अमेरिका प्रथम” की नीति फिर से हावी हुई, तो भारत‑अमेरिका साझेदारी में नई चुनौतियाँ बन सकती हैं।
स्रोत:१- डोनाल्ड ट्रंप की एक गलती और पूरी दुनिया पर मड़राया - (abplive.com)
२- विचार डावा डील होती अमेरिकी अर्थव्यवस्था डोनाल्ड ट्रंप - (jagra.com)
3- भूखे अमेरिकियों को इस शटडाउन की कीमत चुकानी पड़ेगी - (patrika.com)
४- शटडाउन की चपेट में अमेरिका, सरकार हुई ठप: ट्रंप संसद - ( jagarn.com)
५- भारतीयों के लिए मुश्किल देश बना अमेरिका, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल - (jagrn.com)
६- us image Declines in Many Nations Amid L - - (puorasearch.org)
,,7 America के इतिहास का सबसे बुरा दौर ट्रंप के कार्यकाल (prabhasasakshi.com)
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का भारत के प्रति रवैया ,
स्रोत:
१- भारत से दुश्मनी डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी भूल - - अमेरिका (navbharat times.indiatimes.com)
२- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाया भारत पर लगाया 25% (www.indiatv.in)
३- PM मोदी पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, भारत - अमेरिका ( Hindi .news 24 online. Com)
४- निकल गई डोनाल्ड ट्रंप की अकड़! भारत के साथ ट्रेड डील - (www.abplive.com)
५- Donald Trump tarffs apark alarm over India( www.thehindu.com)
६- बदल गए ट्रंप के सुर! एक्सपर्ट बोले - भारत की विदेश नीति - ( gagran.com)
सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी
Sukhmangal Singh
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