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"दो घर, दो सोच"

 

"दो घर, दो सोच"


पात्र :-
1.  भारत में - सुनीता और उसका पति रमेश
2.  अमेरिका में - जेनिफर और उसका पति रॉबर्ट - सुनीता का भाई जो 10 साल से अमेरिका में है।

रमेश रिटायर्ड क्लर्क है। हाथ से चाय भी ठीक से नहीं बना पाता। पर सुनीता को इस बात पर गर्व है।

सुनीता की सोच एकदम देसी है - 
"मेरा पति मेरा बर्तन है।" जैसे कोई जवान बर्तन वाली अपने नए स्टील के भगोने को मांज-मांज कर चमकाती है, और किसी को छूने भी नहीं देती, वैसे ही सुनीता रमेश को देखती है।

रमेश अगर पड़ोसन विमला से 2 मिनट ज्यादा बात कर ले, तो सुनीता का बीपी हाई।
रमेश बोले -
 "विमला बहन कह रही थी, उसके बेटे को..."
सुनीता बीच में - 
"क्यों? तुम्हें ही मिला था बताने को? जब तक मैं जिंदा हूँ, तुम्हें दूसरी तरफ देखने की जरूरत नहीं है। मैं हूँ तो सब देख लूँगी।"

रमेश को गुस्सा नहीं आता, हँसी आती है। वो जानता है, ये हक जताना है, ये भारतीय नारी का प्रेम जताने का तरीका है - अधिकार और कर्तव्य वाला प्रेम। उसके लिए पति ही परमेश्वर है, पर उस परमेश्वर का रिमोट उसके हाथ में होना चाहिए। वो भूखा रहे तो खुद न खाए, पर उसे खिलाए।

दूसरी तरफ अमेरिका में सुनीता का भाई रॉबर्ट...

रॉबर्ट भी रिटायर्ड है। खाना बनाना उसे भी नहीं आता। पर उसकी पत्नी जेनिफर कहती है - "यू आर अ ग्रोन मैन रॉबर्ट, लर्न इट।"

जेनिफर सुनीता से बिल्कुल उल्टी है। वो रॉबर्ट को किसी से भी बात करने से नहीं रोकती। वो कहती है - "तुम्हारी लाइफ है, तुम्हारी चॉइस है।"

रॉबर्ट ने एक दिन फोन पर सुनीता को बताया - "दीदी, यहाँ सुनने में आया है कि लोग अपने घर बच्चों के लिए भी नहीं छोड़ते।"

सुनीता चौंक गई।

रॉबर्ट ने समझाया - "दीदी, यहाँ सोच अलग है। जेनिफर कहती है, हमने घर मेहनत से बनाया है, ये हमारी रिटायरमेंट सिक्योरिटी है। बच्चों को 18 साल के बाद अपना देखना चाहिए। यहाँ प्यार में इंडिपेंडेंस ज्यादा है, अटैचमेंट कम। बच्चे को भी प्रॉपर्टी नहीं, परवरिश और पढ़ाई दी जाती है, फिर वो खुद अपना घर बनाए।"

वो बोला - "और यहाँ अगर जेनिफर मुझे छोड़ भी दे, तो उसे मेरा खाना बनाने की टेंशन नहीं, क्योंकि वो मानती है मैं सक्षम हूँ, या होना चाहिए।"

सुनीता ने लंबी साँस ली और बोली - "भैया, फर्क यही तो है।"

तुलना :-

भारतीय नारी: - 
सुनीता जैसी - पति को अपनी दुनिया मानती है। उसकी ईर्ष्या भी उसके प्रेम का रूप है। वो पति को अक्षम रख कर भी सक्षम रखना चाहती है, ताकि उसकी जरूरत हमेशा बनी रहे। घर बच्चों के लिए ही तो बनाती है। खुद भूखी रह जाएगी पर घर बच्चों के नाम कर जाएगी।

अमेरिकन नारी: - 
जेनिफर जैसी - पति को पार्टनर मानती है, परमेश्वर नहीं। उसका प्रेम भरोसे और बराबरी का है, निगरानी का नहीं। वो कहती है - "मैं तुम्हारे बिना भी पूरी हूँ, तुम मेरे बिना भी पूरे हो, फिर भी हम साथ हैं।" इसलिए घर को एसेट मानती है, विरासत नहीं।

उस रात रमेश ने सुनीता से कहा - "आज विमला बहन से बात की तो तुम जली क्यों?"
सुनीता ने रमेश की थाली परोसते हुए कहा - "जली नहीं, डरी। बर्तन वाली को डर रहता है, कहीं कोई उसका चमकता बर्तन उठा न ले जाए। जब तक मैं हूँ, तुम्हें कोई और क्यों देखे?"

रमेश मुस्कुरा दिया। उसे उस जले हुए रोटी के पीछे का प्रेम समझ आता था।

-  सुख मंगल सिंह

वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी 

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