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Dr. Srimati Tara Singh
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दीपोत्सव

 

दीपोत्सव



दीप जले हर द्वार पर, महके सारा गाँव।
अँधियारा भागे दूर, आया सुख का छाँव।।1।।

राम लखन सीता सहित, लौटे अवध धाम।
दीपों से सज गया, सारा नगर तमाम।।2।।

माटी के दीये में, बसी है माँ की आस।
लक्ष्मी जी पधारेंगी, लेकर सुख उल्लास।।3।।

पटाखे की धूम नहीं, दिलों का हो प्रकाश।
दीपोत्सव का अर्थ यही, मिटे मन का त्रास।।4।।

धन से बढ़कर है यहाँ, प्रेम का उपहार।
दीप जलाओ मन में, यही सच्चा त्योहार।।5।।

घर-घर में बँटे मिठाई, सबके मुख पर हास।
दुश्मन भी गले मिले, मिटे मन का प्यास।।6।।

अँधेरा चाहे कितना हो, दीपक कभी न हार।
एक छोटी सी लौ ही, करती है उजियार।।7।।

लक्ष्मी गणेश पूजन से, होता है कल्याण।
सुख मंगल यही कहे, रखो सबका ध्यान।।8।।

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