*दीपावली की रात*
दीपावली की रात है, मन में है एक बात,
हर तरफ रोशनी है, और खुशियों की बरात।
दीपक की लौ में, हमारा मन है जगमगा रहा,
हर तरफ रंग है, और खुशियों का है त्योहार।
मिठाइयों की खुशबू है, और फूलों की महक,
हर तरफ खुशी है, और प्यार की लहर।
दीपावली की रात में, हम सब हैं एक साथ,
खुशियों के साथ, और प्यार के साथ।
अंधेरे को दूर भगाते हैं, दीपक की रोशनी से,
खुशियों को लाते हैं, अपने दिल की गहराई से।
दीपावली की रात है, एक अनोखी रात,
हर तरफ रोशनी है, और खुशियों की बरात।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी
Sukhmangal Singh
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