Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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दिल की बातें कह ना सका

 

दिल की बातें कह ना सका

कुछ कह ना सका, दिल की बातें रह गई

प्रेम की धारा बहती है, पर कह नहीं पाया
तुम्हारी याद में जीता, पर बोल नहीं पाया
दिल की बातें रह गई, प्रेम की कहानी अधूरी है

तुम्हारी आँखों में देखा, प्रेम की गहराई,
दिल को छू गई, पर कह नहीं पाया।
तुम्हारे हाथों में हाथ, प्रेम की धारा बहती है,
पर बोल नहीं पाया, दिल की बातें रह गई।

तुम्हारी मुस्कान में खो, प्रेम की धुन में जाता,
दिल की बातें कहता, पर कह नहीं पाया।
तुम्हारी याद में जीता, प्रेम की कहानी गाता,
पर बोल नहीं पाया, दिल की बातें रह गई।

तुम्हारे बिना अधूरा, जीवन की कहानी है,
प्रेम की धारा बहती है, पर कह नहीं पाया।
तुम्हारे साथ जीना, प्रेम की कहानी है,
पर बोल नहीं पाया, दिल की बातें रह गई।

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