Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

"धनतेरस अनमोल सौगात"

 

"धनतेरस अनमोल सौगात"



धनतेरस की शुभ बेला, आई लेकर सौगात,
सोना-चाँदी नहीं आज, खुशियाँ बाँटें हर बात।

धन्वंतरि ने अमृत कलश, जब धरा पर लाया था,
आरोग्य का वरदान संग, मानव को वो दे गया था।

कुबेर लक्ष्मी की पूजा, होती आज हर द्वार,
पर असली धन तो है यहाँ, रिश्तों का प्यार।

बाज़ारों में भीड़ लगी, झूम रहे हैं लोग,
सोने की चमक से ज्यादा, अपनों का है योग।

इस बार धनतेरस पर, इक वादा कर लो यार,
सोना नहीं खरीदेंगे, खरीदेंगे प्यार।

माँ के चरणों में बैठकर, पल भर मुस्कायेंगे,
पिता की आँखों में देखकर, उनका दर्द बाँट आयेंगे।

पत्नी के हाथ की रोटी में, जो स्वाद है अपार,
बच्चों की किलकारी में, जो खुशियों का संसार।

वही तो है असली धन, वही तो है सौगात,
रुपये से नहीं खरीदा जाता, अपनों का साथ।

एक दीया गरीब के घर, जाकर जला आओ,
उसकी सूनी झोपड़ी में, खुशियों का दीप जलाओ।

धनतेरस की अनमोल सौगात, यही है सच्ची जान,
रिश्तों में प्रेम भर दो, जीवन में मुस्कान।

सुख मंगल 'मंगल'कहे , धनतेरस का है यही सार,
सोना-चाँदी रह जायेगा, साथ जायेगा प्यार।।

 - कवि सुख मंगल सिंह



Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ