देउर कोठार, मध्य प्रदेश की यात्रा एक अद्भुत अनुभव था। जैसे ही हम इस क्षेत्र में पहुंचे, हमने देखा कि ऊंची-नीची पहाड़ियां और नाला-नाली से भरा हुआ यह क्षेत्र कितना सुंदर और आकर्षक है। ऊंचे-ऊंचे जमीन के टीले और हरियाली से भरे हुए खेतों ने हमारी यात्रा को और भी रोमांचक बना दिया।
बरसात के मौसम में जब बारिश होती है, तो यह क्षेत्र और भी सुंदर हो जाता है। नालों में पानी की धारा बहने लगती है और पहाड़ियों के नीचे से निकलने वाले झरने एक मधुर संगीत की तरह सुनाई देते हैं। जाड़ा के मौसम में जब ठंडी हवा चलती है, तो यह क्षेत्र और भी शांत और सुंदर हो जाता है।
लेकिन देउर कोठार की सबसे बड़ी विशेषता है यहां की प्राचीन मूर्तियां। जैसे ही हम आगे बढ़ते हैं, हमें मंगल की एक सुंदर मूर्ति दिखाई देती है। यह मूर्ति इतनी जीवंत है कि लगता है कि मंगल अपनी यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। मूर्ति के चेहरे पर एक अद्भुत तेज है और उसकी मुद्रा में एक अद्वितीय शक्ति है।
मंगल की यह मूर्ति हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। जैसे ही हम आगे बढ़ते हैं, हमें और भी कई प्राचीन मूर्तियां दिखाई देती हैं। हर मूर्ति एक कहानी कहती है और हमें प्राचीन सभ्यता की समृद्धि के बारे में बताती है।
देउर कोठार की यात्रा हमें प्रकृति की सुंदरता और प्राचीन सभ्यता की समृद्धि के बारे में बताती है। यह यात्रा हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है और हमें जीवन की वास्तविकता के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती है।
देउर कोठार मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल है, जो अपने प्राचीन स्तूपों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह स्थल भगवान बुद्ध के अवशेषों पर बनाए गए स्तूपों के लिए जाना जाता है, जो लगभग 2000 साल पुराने हैं और सम्राट अशोक के शासनकाल से संबंधित हैं।
देउर कोठार की विशेषताएं :
- *स्तूप*: यहां तीन बड़े और 46 छोटे स्तूप हैं, जो मिट्टी और पत्थरों से निर्मित हैं।
- *प्राचीन गुफाएं*: देउर कोठार में 5000 साल पुरानी चट्टानी गुफाएं भी हैं, जो अपनी अनोखी शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।
- *ऐतिहासिक महत्व*: यह स्थल बौद्ध धर्म के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जहां बौद्ध भिक्षु शिक्षा और साधना करते थे।
देउर कोठार की दुर्दशा के बारे में खबरें आई हैं, जहां यह स्थल उपेक्षित पड़ा है और पशु चारागाह बन गया है। इसके जीर्णोद्धार के प्रयास किए जा रहे हैं ।
मैं बस में बैठकर मंगल उत्तर की ओर जा रहा था। रास्ते में कटरा मार्केट आया, तो मैंने बस से उतरने का फैसला किया। मुझे अपने रिश्तेदार का इंतजार करना था, जो मुझे अपने घर पर एक बड़े फंक्शन में ले जाने वाले थे।
मैं मार्केट में घुसा और एक चाय की दुकान पर बैठ गया। चाय पीते हुए, मैं अपने रिश्तेदार का इंतजार करने लगा। मार्केट में काफी भीड़ थी, लेकिन मुझे कोई जल्दी नहीं थी। मैं आराम से चाय पीता हुआ अपने रिश्तेदार का इंतजार करने लगा।
कुछ देर बाद, मेरे रिश्तेदार आए और मुझे अपने साथ चलने के लिए कहा। मैं उनके साथ चल दिया और हम उनके घर पहुंचे, जहां एक बड़ा फंक्शन चल रहा था। मुझे देखकर सभी लोग खुश हुए और मेरा स्वागत किया।
फंक्शन में काफी मजा आया और मैंने अपने रिश्तेदारों से मिलकर खुशी महसूस की। यह एक यादगार दिन था और मैं अपने रिश्तेदारों के साथ बिताए गए समय को कभी नहीं भूल पाऊंगा।
टेंट लगा हुआ था, कुर्सियां सजी हुई थीं, और ग्लास में पानी लोगों के पीने के लिए रखा हुआ था। मिठाइयां तश्तरियों में पड़ी थीं। सब कुछ देखकर मैंने सोचा कि इस रास्ते के माध्यम से कैसे यह सामान यहां लाया गया होगा। शायद ट्रकों या अन्य वाहनों से सामान लाया गया होगा और फिर यहां उतारकर सजाया गया होगा। यह देखकर लग रहा था कि आयोजन की तैयारी बहुत अच्छी तरह से की गई है।
मैंने आगे बढ़कर देखा कि और क्या-क्या तैयारियां की गई हैं। मंच सजाया गया था, और लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई थी। यह एक बड़ा आयोजन लग रहा था, और लोग इसमें शामिल होने के लिए आ रहे थे। मैंने भी अपने रिश्तेदार के साथ इसमें शामिल होने का फैसला किया और हम दोनों मंच की ओर बढ़ चले।
देउर कोठार मध्य प्रदेश की यात्रा हमें कई महत्वपूर्ण सबक देती है:
1. *प्राचीन विरासत का महत्व*: देउर कोठार की यात्रा हमें प्राचीन बौद्ध स्थलों और उनकी विरासत के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है।
2. *सांस्कृतिक धरोहर*: यह स्थल हमें मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के बारे में बताता है।
3. *प्राकृतिक सौंदर्य*: देउर कोठार की प्राकृतिक सुंदरता हमें प्रकृति के करीब ले जाती है और हमें उसकी सराहना करने का अवसर देती है।
4. *आध्यात्मिक अनुभव*: यह स्थल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जो उन्हें आध्यात्मिक शांति और ज्ञान की प्राप्ति में मदद करता है।
5. *इतिहास और पुरातत्व*: देउर कोठार की यात्रा हमें प्राचीन इतिहास और पुरातत्व के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है, जो हमारे ज्ञान को बढ़ाता है और हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी,

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