*देश के गौरव गान*
जन गण मन अधिनायक जय हे,
भारत भाग्य विधाता।
पंजाब सिंध गुजरात मराठा,
द्राविड़ उत्कल वंग।
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा,
उच्छल जलधि तरंग।
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष मांगे,
गाहे तव जय गाथा।
जन गण मंगलदायक जय हे,
भारत भाग्य विधाता।
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे।
*खतरे से बचाव का संदेश*
परंतु हे भारतवासी, सावधान रहो,
देश के गौरव को खतरा है।
प्रदूषण, भ्रष्टाचार, और आतंकवाद,
देश को खतरे में डाल रहे हैं।
हमारे जल, वायु, और मिट्टी को,
प्रदूषण से बचाना होगा।
भ्रष्टाचार को खत्म करना होगा,
आतंकवाद को रोकना होगा।
हमारे देश की एकता और अखंडता,
को बनाए रखना होगा।
हमारे बच्चों के भविष्य के लिए,
देश को सुरक्षित बनाना होगा।
हमारे देश के गौरव को,
बचाना होगा।
जय हो भारत माता,
तुम्हारी जय हो।
हमारे देश की रक्षा,
हमारी जिम्मेदारी है।
हम सब मिलकर,
देश को सुरक्षित बनाएंगे।
हमारे देश के गौरव को,
बचाएंगे।
जय हो भारत माता,
तुम्हारी जय हो।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
Sukhmangal Singh
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