Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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"देश और परिवार"

 
"देश और परिवार"  


देश की नींव में परिवार का प्रेम बसता है,  
परिवार की माला में देश की ममता बसती है। 
सुबह माँ पूजा करती तिरंगे को नमन कर,  
पिता खेत में पसीना बहाए देश को अन्न दें।  

भाई सीमा पर खड़ा होकर माँ की लाज बचाए,  
बहन चिट्ठी लिखे भैया घर जल्दी लौट आएं।  
दादा गीता का पाठ सुनाए संस्कार की बात करें , 
दादी लोकगीत गाए देशभक्ति की प्याला भरे । 

रोटी एक थाली में बंटे तो भूख सबकी मिट जाए,  
खुशी एक आँगन में हो तो गाँव सारा हर्षाए ।
देश की तरक्की में परिवार का सहयोग लगता है,  
परिवार की एकता में देश का भविष्य पलता है।  

हे भारत माँ तेरे घर में हम दीप जलाएँ ,
तेरी सेवा में तन मन धन सब कुछ काम लगाएँ ।
जब तक साँस चले देश और परिवार का मान बढ़ाएँ,  
तेरी गोद में जीएँ और तेरी गोद में मर जाएँ  ।।

- डॉ. सुखमंगल सिंह/वाराणसी 





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