देव दीपावली की रात, जब बनारस जगमगाए,
दीयों की रोशनी में, हर घर चमक जाए।
गंगा के घाटों पर, दीपों की पंक्ति सजाए,
देवताओं की आभा, पृथ्वी पर उतर आए।
दीपों की रोशनी में, हर चेहरा खिल जाए,
हर दिल में खुशियों की बहार आ जाए।
गंगा की लहरें, दीपों को चूम ले,
देव दीपावली की रात, स्वर्ग की सैर कराए।
दीयों की रोशनी में, हर घर सज जाए,
देवताओं की कृपा, हर दिल में बसी जाए।
गंगा के घाटों पर, दीपों की महफिल सजाए,
देव दीपावली की रात, जीवन को सार्थक बनाए।
दीपों की रोशनी में, हर अंधकार दूर हो,
हर दिल में खुशियों की बहार आ जाए।
गंगा की लहरें, दीपों को चूम ले,
देव दीपावली की रात, स्वर्ग की सैर कराए।
दीयों की रोशनी में, हर घर चमक जाए,
देवताओं की आभा, पृथ्वी पर उतर आए।
गंगा के घाटों पर, दीपों की पंक्ति सजाए,
देव दीपावली की रात, जीवन को सार्थक बनाए।
दीपों की रोशनी में, हर दिल खुश हो जाए,
देव दीपावली की रात, स्वर्ग की सैर कराए।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी
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