Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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*चावल की बात*

 
*चावल की बात*  

चावल है धरती का उजला वरदान,  
शरीर को देता है ऊर्जा का दान।  
पचने में हल्का, पेट को भाए,  
कमजोर को भी ताकत दे जाए।  

बुखार में खिचड़ी बनकर आए,  
बीमार तन को राहत दिलाए।  
ग्लूटेन नहीं, इसलिए निरापद,  
सीलिएक वालों का सच्चा हमदम।  

दाल के संग जब चावल मिलता,  
प्रोटीन पूरा तन में खिलता।  
राजमा-चावल जोड़ी पुरानी,  
स्वाद संग सेहत की ये निशानी।  

दही-चावल दोपहर की ठंडक,  
लू से बचाए, दे पेट को रौनक।  
सब्जी भरी, रंग-बिरंगी थाली,  
चावल संग लगे खुशियों की लाली।  

मछली-चावल बंगाल की शान,  
ओमेगा-3 का खजाना महान।  
कढ़ी-चावल पंजाब का प्यार,  
खट्टा-मीठा सेहत का त्योहार।  

घी की खुशबू संग जब खाओ,  
पाचन अग्नि को और बढ़ाओ।  
काला नमक, जीरा, हींग मिलाओ,  
वात को शांत, गैस भगाओ।  

पर सुनो अब किस संग न खाना,  
सेहत का ये भेद पुराना।  
दूध और चावल एक साथ भारी,  
पेट में करे ये खलबली सारी।  

खट्टे फल संग चावल न खाए,  
पाचन मंद हो, अफारा आए।  
तरबूज-खरबूज बाद में खाना,  
चावल संग जहर समान बताना।  

ठंडा दही रात में न भाए,  
चावल संग कफ को बढ़ाए।  
मैदा, तला संग मत रोज़ खाओ,  
मोटापा और सुस्ती बुलाओ।  

सफेद चावल ज्यादा न खाना,  
शुगर वाले थोड़ा-सा ही पाना।  
ब्राउन चावल चुनो समझदारी,  
फाइबर से भरी हो थाली सारी।  

नियम से खाओ, मात्रा का ध्यान,  
चावल बनेगा तभी अमृत समान।  
श्रम करो, फिर चावल पचाओ,  
तन को निरोगी, मन को हर्षाओ।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी 


Sukhmangal Singh

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