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"बीते पलों की वापसी"

 

Sukhmangal Singh 


Thu, Aug 6, 10:41 AM (20 hours ago)




to me


"बीते पलों की वापसी"

बीते पलों की वापसी, क्या कभी हो पाती है,  
टूटे हुए सपनों की, कश्ती फिर किनारे आती है?  
पुरानी तस्वीरों में, जो हँसी कैद हो गई,  
वो आवाजें गलियों में, आज भी गूंजती रही।  

बचपन का वो आँगन, दादी की लोरी याद आती,  
कागज की नाव, बारिश में, नदी सी बह जाती।  
स्कूल का वो घंटा, दोस्तों का ठहाका,  
जेब में दस का सिक्का, और सपनों का बाँका।  

समय के हाथों में, सब कुछ फिसल जाता है,  
जो कल अपना था, आज गैर बन जाता है।  
चाह कर भी लौट नहीं सकते, उन गलियों में दोबारा,  
यादों के दरवाजे पर, बस खड़े रह जाते हैं बेचारा।  

बीते पल सिखाते हैं, जो गया वो सबक था,  
आने वाले कल में, जीना ही असल हक था।  
अतीत की छाया में, भविष्य को मत खोना,  
बीते पलों को जी लो, पर आज को मत रोना।।  

- डॉ सुखमंगल सिंह,
  वाराणसी 
बीते पल लौटते नहीं पर हमें मजबूत जरूर बनाते हैं।

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