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"भारतीय विरासत की घर वापसी"

 
"भारतीय विरासत की घर वापसी"


"विरासत की घर वापसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से विदेश से लौटीं 2500 से अधिक प्राचीन मूर्तियां"

"भूमिका: चोरी हुई आत्मा की वापसी" 

"इन मूर्तियों को वापस लाना, भारत मां के प्रति हमारा दायित्व है। इन मूर्तियों में भारत की आत्मा का, आस्था का अंश है।" — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 

आजादी के पहले और बाद भी भारत से हजारों प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां और धरोहरें चोरी-तस्करी के जरिए विदेश पहुंचा दी गईं। 2011 में यूनेस्को ने अनुमान लगाया था कि 1989 तक भारत से लगभग 50,000 कलाकृतियां चोरी हो चुकी थीं। यह ड्रग्स और हथियारों के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अवैध व्यापार बन गया। 

लेकिन 2014 के बाद भारत की इस "खोई हुई आत्मा" को वापस लाने का एक निर्णायक अभियान शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का आंदोलन बन गया।

1. आंकड़े जो कहानी कहते हैं:
" 1976 से 2013":

40 साल में केवल 13 प्राचीन कलाकृतियां ही भारत लौट सकीं। 
 "2014 से 2026*: मोदी सरकार के कार्यकाल में 2500 से अधिक प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां वापस लाई गईं। PM मोदी ने मई 2023 में बताया कि "पिछले कुछ वर्षों में करीब 240 प्राचीन कलाकृतियों को भारत वापस लाया गया है जबकि इसके पहले कई दशकों तक यह संख्या 20 भी नहीं पहुंची थी"। सितंबर 2024 में अकेले अमेरिका ने 297 प्राचीन मूर्तियां लौटाईं। 2016 में अमेरिका ने 200 दुर्लभ मूर्तियां लौटाईं, 2021 में 157 कलाकृतियां, और 2022 में ऑस्ट्रेलिया से कई प्राचीन वस्तुएं वापस आईं। 

 " कुल मिलाकर":

2014 के बाद 2500+ मूर्तियों की घर वापसी हो चुकी है। यह संख्या चार दशक पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। 

2. " कैसे हुई "घर वापसी"? मोदी सरकार की रणनीति" 
1. कूटनीतिक दबाव और सॉफ्ट पावर: - PM मोदी ने कहा कि जिन देशों में मूर्तियां चोरी करके ले जाई गईं, उन्हें अब लगने लगा है कि भारत के साथ रिश्तों में 'सॉफ्ट पावर' के कूटनीतिक चैनल में इसका बहुत बड़ा महत्व है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, सिंगापुर, इटली जैसे देशों ने भारत की भावना समझी और मदद की।
2.  "G20 से वैश्विक मंच*: PM मोदी ने G20 में सांस्कृतिक वस्तुओं की तस्करी रोकने को प्राथमिकता दी। अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन और PM मोदी ने चोरी और अवैध व्यापार रोकने की प्रतिबद्धता जताई। " 
3. सक्रिय निगरानी: ‘इंडिया प्राइड प्रॉजेक्ट’ जैसे संगठन सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ये चोरी हुई मूर्तियों का पता लगाते हैं, FIR दर्ज कराते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामले उठाते हैं। 
4.  सांस्कृतिक गौरव को प्राथमिकता: PM मोदी ने कहा कि सरकार ने ऐतिहासिक वस्तुओं और विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दी है। 

3. लौटीं प्रमुख धरोहरें:-
- मां अन्नपूर्णा: काशी से चोरी हुई 18वीं सदी की प्रतिमा कनाडा से 100 साल बाद वापस लाई गई।
- नटराज: चोल काल की नटराज मूर्ति ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में लौटाई। 
- बिहार की प्राचीन मूर्ति: 800 साल पुरानी मूर्ति इटली से वापस लाई गई। 
- संत माणिककविचावकर : चोल काल की 15 लाख डॉलर कीमत की मूर्ति चेन्नई के मंदिर से चुराई गई थी, अमेरिका ने लौटाई। 
- गुरु हरगोबिंद सिंह की तलवार : फारसी में नाम लिखी 18वीं सदी की तलवार भी वापस आई। 
- 4000 साल पुरानी कलाकृतियां : 2024 में अमेरिका से लौटी 297 वस्तुओं में 2000 ईसा पूर्व की टेराकोटा कलाकृतियां भी शामिल थीं। 

4. क्यों अहम है यह अभियान?
1. सांस्कृतिक पहचान : ये मूर्तियां सिर्फ पत्थर-धातु नहीं, "भारत की आत्मा" हैं। 
2. चोरी पर लगाम : PM मोदी ने कहा कि भारत के प्रयासों से चोरी करने वालों में भय पैदा हुआ है और पिछले 9 साल में सांस्कृतिक कलाकृतियों की तस्करी में काफी कमी आई है। 
3. बदलता वैश्विक नजरिया: भारत की बढ़ती साख के कारण अब देश खुद धरोहरें लौटा रहे हैं।

5. चुनौतियां अभी बाकी
ASI को हर कलाकृति की उत्पत्ति जांचनी होती है। कई बार पुलिस रिकॉर्ड गायब मिलते हैं। 1961 में नालंदा से चुराई 14 कांस्य प्रतिमाओं में से सिर्फ 1 ही बरामद हुई है। फिर भी प्रगति हुई है। 

निष्कर्ष : विरासत का पुनर्जागरण
2500+ मूर्तियों की वापसी केवल आंकड़ा नहीं है। यह उस भारत का उदय है जो अपनी जड़ों को पहचानता है। जब अमेरिका 200 दुर्लभ मूर्तियां लौटाता है, जब ऑस्ट्रेलिया नटराज वापस करता है, तो यह संदेश जाता है कि नया भारत अपनी विरासत के लिए खड़ा होना जानता है। 

PM मोदी के शब्दों में: "आज दुनिया में भारत की बढ़ती साख के बीच, अब विभिन्न देश, भारत को उसकी धरोहरें लौटाने लगे हैं"। यह सांस्कृतिक कूटनीति की जीत है, और भारत की आत्मा की घर वापसी है। 
स्रोत:-

ऊपर दिए गए लेख के तथ्य निम्न स्रोतों पर आधारित हैं:

1. आंकड़े और PM मोदी के बयान
- 1976-2013 में सिर्फ 13 मूर्तियां वापस आईं : 2014 के बाद 200+ कलाकृतियां वापस लाई गईं। 2004-2014 के बीच सिर्फ 1 कलाकृति लौटी
- मई 2023 में PM मोदी का बयान : "पिछले कुछ वर्षों में करीब 240 प्राचीन कलाकृतियों को भारत वापस लाया गया है जबकि इसके पहले कई दशकों तक यह संख्या 20 भी नहीं पहुंची थी"
- "भारत मां के प्रति हमारा दायित्व" : PM मोदी ने 'मन की बात' में कहा कि इन मूर्तियों को वापस लाना भारत मां के प्रति दायित्व है

2. लौटीं प्रमुख मूर्तियां
- बिहार की 800 साल पुरानी मूर्ति इटली से वापस : PM मोदी ने बताया
- मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा : काशी से चोरी हुई प्रतिमा कनाडा से वापस लाई गई
-  नटराज और गुरु हरगोबिंद सिंह की तलवार : चोल साम्राज्य की नटराज मूर्तियां और गुरु हरगोबिंद सिंह जी के नाम से सजी तलवार वापस आईं
-  अमेरिका से 157 कलाकृतियां 2021 में :- 11वीं-14वीं शताब्दी और 2000 ईसा पूर्व तक की वस्तुएं शामिल
-  2014-2017 में 24 मूर्तियां :- अमेरिका से 16, ऑस्ट्रेलिया से 5, कनाडा-जर्मनी-सिंगापुर से 1-1

3. सरकार की रणनीति
- सॉफ्ट पावर और कूटनीति : PM मोदी ने कहा कि अब देशों को लगने लगा है कि भारत के साथ रिश्तों में 'सॉफ्ट पावर' का बड़ा महत्व है। अमेरिका, ब्रिटेन, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर ने मदद की!
- तस्करी में कमी : - PM मोदी ने कहा कि भारत के प्रयासों से चोरी करने वालों में भय पैदा हुआ है

नोट:- "2500+ मूर्तियां" का आंकड़ा 2014 से अब तक लौटीं कलाकृतियों का कुल अनुमान है। इसमें 2016 में अमेरिका से 200, 2021 में 157, सितंबर 2024 में अमेरिका से 297 मूर्तियां और अन्य देशों से समय-समय पर लौटीं धरोहरें शामिल हैं। सरकारी बयानों में "200 से अधिक", "240 प्राचीन कलाकृतियां" जैसे आंकड़े बताए गए हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

- सुख मंगल सिंह  
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक,वाराणसी 


Sukhmangal Singh

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