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Dr. Srimati Tara Singh
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भारत में लेजर हथियार: उत्पादन और सुरक्षा

 

*भारत में लेजर हथियार: उत्पादन और सुरक्षा*


1. *वर्तमान उत्पादन और विकास*
*DRDO के प्रमुख लेजर हथियार सिस्टम:*
सिस्टम    पावर    रेंज    स्थिति    खासियत
**IDD&IS Mk-I**    2 kW    1 किमी    23 सिस्टम सेना में शामिल, ₹400 करोड़    LoC पर चीनी ड्रोन गिराया अप्रैल 2025 में
**IDD&IS Mk-II**    10 kW    2 किमी    16 सिस्टम सेना/वायुसेना ऑर्डर करने वाली है    COIL तकनीक, 2025 में ऑर्डर
**Mk-II(A) DEW**    30 kW    3.5-5 किमी    परीक्षण सफल, 1-1.5 साल में यूजर ट्रायल    ड्रोन स्वार्म, फिक्स्ड-विंग, मिसाइल, सेंसर नष्ट
**सूर्या**    300 kW    20 किमी    विकास में    तेज गति की मिसाइल/ड्रोन नष्ट करेगा
**एयरबोर्न DEW**    -    -    2027 में टेस्टिंग    Tejas Mk2, Su-30MKI, AMCA फाइटर जेट पर लगेगा
*उत्पादन*: 
- DRDO की CHESS हैदराबाद, LRDE, IRDE, DLRL लैब बना रही हैं।
- *निजी कंपनियां*: Apollo Micro Systems को DRDO से 10 kW लेजर DEW और EO ट्रैकिंग सिस्टम की टेक्नोलॉजी मिली। Kalyani Group भी DEW बना रहा है।
- *फ्रांस से HELMA-P*: AXISCADES-CILAS डील के तहत भारतीय सेना को एंटी-ड्रोन लेजर गन मिलेगी। भारत में उत्पादन व टेक ट्रांसफर होगा।

2. *कैसे काम करता है लेजर हथियार*
1. *लाइट की रफ्तार*: लेजर बीम प्रकाश की गति $3,00,000 km/s$ से लक्ष्य को भेदता है।
2. *लागत बेहद कम*: कुछ सेकंड फायर करने का खर्च "2-3 लीटर पेट्रोल" के बराबर। मिसाइल 2-3 करोड़ की पड़ती है, लेजर शॉट कुछ सौ रुपये का।
3. *360° सेंसर*: रडार या इनबिल्ट EO सिस्टम से टारगेट डिटेक्ट कर सेकंडों में नष्ट करता है।
4. *कोई कोलैटरल डैमेज नहीं*: सिर्फ टारगेट को जलाता/पिघलाता है, आसपास नुकसान नहीं।

3. *भारत की सुरक्षा को फायदे*

*1. ड्रोन और स्वार्म हमले रोकना*
- पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे थे। Mk-II(A) ने अप्रैल 2025 में कुरनूल में 7 ड्रोन का स्वार्म एक साथ नष्ट किया।
- 2 kW सिस्टम LoC पर तैनात हैं। 10 kW सिस्टम 2 किमी तक ड्रोन मारेगा।

*2. मिसाइल डिफेंस*
- *Mk-II(A)*: मिसाइल, ड्रोन, छोटे प्रोजेक्टाइल नष्ट करने में सक्षम।
- *सूर्या 300 kW*: 20 किमी दूर तेज गति की मिसाइलों को हवा में ही जला देगा। यह भारत का ‘लेजर शील्ड’ होगा।
- *एयरबोर्न DEW*: 2027 में टेस्ट। फाइटर जेट पर लगकर दुश्मन की हवा-से-हवा और जमीन-से-हवा मिसाइल को हवा में ही नष्ट करेगा। फ्लेयर-चैफ से बेहतर।

*3. लागत में भारी बचत*
DRDO DG डॉ. बीके दास: "यह ‘बीम किल’ है, ‘काइनेटिक किल’ नहीं। लंबे युद्ध में बहुत सस्ता पड़ेगा"। एक ड्रोन 500 रु. का हो सकता है, मिसाइल 2 करोड़ की। लेजर से उसे रोकना हजार गुना सस्ता।

*4. रणनीतिक बढ़त*
- भारत अमेरिका, रूस, चीन, इजरायल के बाद 5वां देश बना जिसके पास हाई-पावर लेजर DEW है।
- *सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस*: 2035 तक बड़े शहरों की सुरक्षा के लिए। इसमें लेजर हथियार अहम होंगे। इजरायल के 100 kW आयरन बीम से तालमेल की चर्चा।
- *स्टार वॉर्स क्षमता*: DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर कामत: "हम हाई-एनर्जी माइक्रोवेव, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स पर भी काम कर रहे हैं। ये हमें स्टार वॉर्स जैसी ताकत देंगे"।

*5. मल्टी-डोमेन तैनाती*
जमीन, जहाज, हवाई जहाज, ट्रेन, सड़क से तैनात हो सकता है। नौसेना के जहाजों पर लगाने से ड्रोन, फास्ट अटैक क्राफ्ट, मिसाइल से बचाव।

4. *चुनौतियां*
1. *मौसम*: बारिश, कोहरा, धूल में लेजर की ताकत घटती है।
2. *पावर*: 300 kW के लिए बहुत बड़ी बैटरी/जनरेटर चाहिए।
3. *कूलिंग*: लेजर फायर करने पर सिस्टम बहुत गर्म होता है।
4. *लेजर सोर्स*: अभी जर्मनी से आयात होता है।

*निष्कर्ष*: भारत ने 2 kW से 30 kW तक के लेजर हथियार बना लिए हैं और 300 kW ‘सूर्या’ पर काम चल रहा है। 2027 तक फाइटर जेट पर लेजर लग जाएगा। यह ड्रोन, मिसाइल, स्वार्म अटैक के खिलाफ बेहद सस्ता और सटीक हथियार है। इससे भारत की वायु रक्षा ‘लेजर शील्ड’ में बदल रही है और चीन-पाकिस्तान के सस्ते ड्रोन हमलों का जवाब मिल गया है।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक, वाराणसी वासी, अवध निवासी, अंबेडकर नगर जनपद, उत्तर प्रदेश, भारत 


Sukhmangal Singh

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