भक्ति रस में शक्ति समृद्धि होती है,
जब दिल से प्रभु को पुकारा जाता है।
भक्ति की राह में, शक्ति का संचार,
जब आत्मा से आत्मा का मिलन होता है।
भक्ति रस में, मन की शांति मिलती है,
जब प्रभु के चरणों में, सिर झुकाया जाता है।
भक्ति की शक्ति से, जीवन की राह,
जब प्रभु की कृपा से, जीवन संवरता है।
भक्ति रस में, समृद्धि की बरसात,
जब प्रभु की भक्ति में, मन रम जाता है।
भक्ति की शक्ति से, जीवन की जीत,
जब प्रभु की शरण में, जीवन समर्पित होता है।
भक्ति रस में, शक्ति का प्रकाश,
जब प्रभु की भक्ति में, मन जगमगाता है।
भक्ति की राह में, जीवन की सफलता,
जब प्रभु की कृपा से, जीवन सफल होता है।
- सुख मंगल सिंह
वाराणसी
Sukhmangal Singh
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