Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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भटके हुऎ भक्त को पुनः प्रभु अपना लेता है

 
एक दिन, मैं एक पहाड़ी क्षेत्र में घूमने गया था। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता ने मुझे आकर्षित किया, और मैं एक छोटे से मंदिर में पहुँच गया। मंदिर में एक छोटी सी मूर्ति थी, और मैं उसके सामने बैठ गया।

अचानक, मुझे एक अनोखी अनुभूति हुई। मुझे लगा कि मैं अपने आप से अलग हो गया हूँ, और मेरे चारों ओर एक अजीब सी रोशनी फैल गई है। मुझे लगा कि मैं एक बड़े से सागर में डूब रहा हूँ, और उस सागर में मुझे एक अनंत शांति का अनुभव हो रहा है।

मुझे लगा कि मैं अपने आप को भूल गया हूँ, और मेरे अंदर एक अनोखी खुशी का अनुभव हो रहा है। मुझे लगा कि मैं एक बड़े से प्रेम में डूब रहा हूँ, और उस प्रेम में मुझे एक अनंत आनंद का अनुभव हो रहा है।

उस समय, मुझे लगा कि प्रभु की कृपा मुझ पर है, और वह मुझे अपने करीब बुला रहे हैं। मुझे लगा कि मैं एक छोटे से बिंदु से एक बड़े से सागर में बदल गया हूँ, और उस सागर में मुझे एक अनंत शांति और आनंद का अनुभव हो रहा है।

उस दिन के बाद, मेरे जीवन में एक बड़ा परिवर्तन आया। मुझे लगा कि मैं एक नए जीवन में प्रवेश कर गया हूँ, और मेरे अंदर एक अनोखी शक्ति और ऊर्जा का अनुभव हो रहा है। मुझे लगा कि प्रभु की कृपा मुझ पर है, और वह मुझे अपने रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

- सुख मंगल सिंह


Sukhmangal Singh

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