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Dr. Srimati Tara Singh
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बेटी: घर का प्राण रूप

 
बेटी: घर का प्राण रूप

घनश्ररी:

बेटी है घर की शोभा, घर का प्राण रूप
प्यार और स्नेह का, दिल में रखती है भूप

बेटी है घर की लक्ष्मी, घर की शान
पिता के दिल की दुआ, माता की पहचान

बेटी है घर की खुशी, घर का गीत
जिंदगी को बनाती है, प्यार और प्रीत

बेटी है घर का भविष्य, घर का नाम
प्यार और स्नेह का, दिल में रखती है काम

बेटी है घर की बेटी, घर की शान
पिता के दिल की दुआ, माता की पहचान

घनश्ररी की विशेषताएं:

- 8 पंक्तियों की एक इकाई होती है, जिसे घनश्ररी कहते हैं।
- प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएं होती हैं।
- घनश्ररी में कविता की लातिनी और भावपूर्ण शैली होती है।
- घनश्ररी में अक्सर भक्ति, प्रेम और जीवन के अनुभवों को व्यक्त किया जाता है।
- सुख मंगल सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी वासी,अवध निवासी 
Sukhmangal Singh





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