Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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*बसंत ऋतु: श्रृंगार धरा पर*

 
सुख मंगल सिंह की डायरी*

*बसंत ऋतु: श्रृंगार धरा पर*

आज बसंत ऋतु का पहला दिन है। प्रकृति ने अपना रंग बदल लिया है। पेड़ों पर नए पत्ते आ गए हैं, फूल खिल गए हैं, और हवा में एक अलग ही खुशबू है। मैं आज सुबह जल्दी उठ गया और बसंत की इस नई सुबह का आनंद लेने के लिए बाहर निकल आया।

बाहर निकलते ही मैंने देखा कि प्रकृति ने अपना श्रृंगार कर लिया है। पेड़ों पर नए पत्ते आ गए हैं, जो हवा में झूम रहे हैं। फूल खिल गए हैं, जो अपनी खुशबू से वातावरण को भर रहे हैं। हवा में एक अलग ही खुशबू है, जो मन को आनंदित कर रही है।

मैं बसंत की इस नई सुबह का आनंद लेते हुए अपने बगीचे में चला गया। वहां मैंने देखा कि आम के पेड़ पर नए पत्ते आ गए हैं, जो हवा में झूम रहे हैं। चंपा के फूल खिल गए हैं, जो अपनी खुशबू से वातावरण को भर रहे हैं। मैं बसंत की इस नई सुबह का आनंद लेते हुए अपने बगीचे में बैठ गया।

बसंत ऋतु वास्तव में श्रृंगार धारा का है। प्रकृति ने अपना श्रृंगार कर लिया है, और वह अपने नए रूप में बहुत ही सुंदर लग रही है। मैं बसंत की इस नई सुबह का आनंद लेते हुए अपने आप को बहुत ही खुश महसूस कर रहा हूँ।

बसंत ऋतु का यह समय वास्तव में प्रेम और आनंद का समय है। प्रकृति ने अपना रंग बदल लिया है, और वह अपने नए रूप में बहुत ही सुंदर लग रही है। मैं बसंत की इस नई सुबह का आनंद लेते हुए अपने आप को बहुत ही खुश महसूस कर रहा हूँ।

*बसंत ऋतु के कुछ और अनुभव*

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